लेबनान में सुरंग का भंडाफोड़, हिज्बुल्लाह की गतिविधियों पर सवाल
यरूशलेम/बेरुत: इज़रायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने दक्षिणी लेबनान के माजदल जौन गांव के ठीक नीचे हिज्बुल्लाह की एक बेहद विशाल और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सुरंग का पर्दाफाश किया है। करीब 200 मीटर लंबी और 29 मीटर गहरी यह सुरंग इजरायल की सीमा के बेहद करीब बनाई गई थी। इस भूमिगत सैन्य ठिकाने से इजरायल पर बड़े हमले के लिए तैयार किए गए सैकड़ों आधुनिक हथियार, घातक एंटी-टैंक मिसाइलें और ईरान में बने 50 सुसाइड (विस्फोटक) ड्रोन का एक बड़ा जखीरा बरामद हुआ है। आईडीएफ के मुताबिक, यह खोज वर्ष 2006 के युद्धविराम समझौते के तहत सीमावर्ती इलाकों को सुरक्षित करने के मिशन का एक अहम हिस्सा है।
एलीट याहलोम यूनिट का ऑपरेशन और हिज्बुल्लाह को भारी नुकसान
इस बेहद जटिल भूमिगत नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए आईडीएफ की 551वीं ब्रिगेड और एलीट कमांडो विंग 'याहलोम यूनिट' (Yahalom Unit) के सैनिकों ने दक्षिणी लेबनान में एक बड़ा विशेष अभियान चलाया था। पिछले सप्ताह चले इस कड़े सैन्य ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने 20 से अधिक हिज्बुल्लाह लड़ाकों को मार गिराया और सुरंग के आसपास बने कई अन्य लॉन्चिंग पैड्स को भी तबाह कर दिया। सुरंग के भीतर से मिले अत्याधुनिक लॉन्च शाफ्ट, लंबे समय तक रहने के लिए बनाए गए सुसज्जित कमरे और भारी सैन्य साजो-सामान से यह साफ होता है कि हिज्बुल्लाह इजरायल के खिलाफ एक सुनियोजित और बड़े पैमाने पर हमले (Surprise Attack) की फिराक में था।
ईरानी फंडिंग और 'ह्यूमन शील्ड' की खतरनाक रणनीति
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस विशालकाय सुरंग का निर्माण पिछले एक दशक के दौरान ईरान से मिली भारी फंडिंग और तकनीकी विशेषज्ञता के दम पर किया गया था। इस खुफिया नेटवर्क की सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसे जानबूझकर नागरिक आबादी वाले गांवों, रिहायशी घरों और मस्जिद जैसी बेहद संवेदनशील जगहों के ठीक नीचे खोदा गया था। यह खोज हिज्बुल्लाह की उस पुरानी युद्ध रणनीति को उजागर करती है जिसमें वह आम नागरिकों को 'मानव ढाल' (Human Shield) के रूप में इस्तेमाल करता है, ताकि इजरायली हवाई हमलों से अपनी सैन्य संपत्तियों को बचा सके। ईरान का मुख्य उद्देश्य हिज्बुल्लाह के जरिए इजरायल को सीमा पर उलझाए रखना और मध्य-पूर्व में अपना दबदबा बढ़ाना है।
नाजुक युद्धविराम पर संकट और आईडीएफ की खुली चेतावनी
"दक्षिणी लेबनान में हमारे तलाशी अभियान और तेज होंगे। यदि हिज्बुल्लाह ने भविष्य में किसी भी हिमाकत की कोशिश की, तो इजरायल की जवाबी कार्रवाई पहले से कहीं ज्यादा घातक होगी।" — प्रवक्ता, इजरायल डिफेंस फोर्सेज
इस बड़ी कामयाबी के बाद आईडीएफ ने साफ कर दिया है कि सीमा पर घोषित युद्धविराम के बावजूद इजरायल अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा और दक्षिणी लेबनान में ऐसे गहन तलाशी अभियान जारी रहेंगे। इजरायल का आरोप है कि हिज्बुल्लाह शांति समझौते की आड़ में अपनी सैन्य क्षमताओं को दोबारा मजबूत कर रहा था। वहीं, लेबनान इन सैन्य अभियानों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बता रहा है। बहरहाल, रिहायशी इलाकों के नीचे मिली इस 'ड्रोन फैक्ट्री और मिसाइल डिपो' ने दोनों देशों के बीच बने बेहद नाजुक युद्धविराम की स्थिरता पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

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