राजनाथ सिंह ने किया डीआरडीओ मुख्यालय का दौरा, वरिष्ठ विज्ञानियों से की चर्चा
सेना को तकनीकी रूप से उन्नत बल में बदलने के उद्देश्य से सरकार द्वारा 2025 को रक्षा सुधारों का वर्ष घोषित करने के एक दिन बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा कि डीआरडीओ निर्धारित उद्देश्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सेना के तीनों अंगों के बीच तालमेल बढ़ाने को लेकर कही ये बात
राजनाथ ने डीआरडीओ मुख्यालय का दौरा किया और इसके 67वें स्थापना दिवस के मौके पर वरिष्ठ विज्ञानियों और विभिन्न अधिकारियों के साथ बातचीत की। सरकार ने बुधवार को 2025 को रक्षा सुधारों का वर्ष घोषित किया था और कहा था कि इसका उद्देश्य सेना के तीनों अंगों के बीच तालमेल बढ़ाने के लिए एकीकृत थिएटर कमान शुरू करना तथा सेना को तकनीकी रूप से उन्नत और युद्ध के लिए तैयार बल में बदलना है।
रक्षा मंत्रालय ने जिन सुधारों की योजना बनाई है उनका व्यापक उद्देश्य रक्षा खरीद प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाना, प्रमुख हितधारकों के बीच गहन सहयोग सुनिश्चित करना, बाधाओं को दूर करना, अक्षमताओं को समाप्त करना और संसाधनों का अधिक से अधिक उपयोग करना है।
रक्षा विज्ञानियों से किया यह आग्रह
रक्षा मंत्री ने गुरुवार को डीआरडीओ से तेजी से विकसित हो रहे तकनीकी इकोसिस्टम के साथ तालमेल बैठाते हुए आगे बढ़ने और बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप रक्षा उपकरण तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने रक्षा विज्ञानियों से आग्रह किया कि वे तकनीकी रूप से उन्नत देशों द्वारा अपनाए जा रहे उत्पादों और प्रक्रियाओं पर नजर रखें तथा विशिष्ट प्रौद्योगिकियों का विकास करें।
आगे कहा कि डीआरडीओ की प्रत्येक प्रयोगशाला को दो-तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं की पहचान करनी चाहिए और उन्हें 2025 तक पूरा करना चाहिए। अगले स्थापना वर्ष तक हमारे पास ऐसी 100 परियोजनाएं होनी चाहिए जो पूरी की जा चुकी हों। राजनाथ ने निजी क्षेत्र के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में डीआरडीओ के प्रयासों की सराहना की, जिसमें संगठन द्वारा अपनी तकनीकें प्रदान करना और अपने पेटेंट तक मुफ्त पहुंच प्रदान करना शामिल है।
निजी क्षेत्र की भागीदारी को लेकर कही ये बात
उन्होंने संगठन से ऐसे और क्षेत्रों की पहचान करने का आग्रह किया, जो निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ा सकते हैं और साथ ही इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्र तभी प्रगति कर सकता है, जब सभी हितधारक मिलकर काम करें। रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ से अपने अनुसंधान एवं विकास प्रयासों में स्टार्ट-अप को शामिल करने की संभावना तलाशने का आग्रह किया। कहा कि इससे विचारों के बहुमूल्य आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय रक्षा क्षेत्र को बदलते समय के हिसाब से नवीन तकनीकों के साथ आगे आने का अवसर मिलेगा।

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