ऑपरेशन सिंदूर: कैसे भारतीय जवानों ने आतंक के ठिकानों को किया ध्वस्त
पहलगाम: जम्मू-कश्मीर की हसीन वादियों में एक साल पहले आतंकियों द्वारा किए गए कायराना हमले का जवाब भारत ने जिस पराक्रम से दिया, उसकी गाथा आज भी हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर देती है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के नाम से जानी जाने वाली इस सैन्य कार्रवाई ने न केवल सीमा पार बैठे दुश्मनों के हौसले पस्त किए, बल्कि आधुनिक तकनीक और मानवीय साहस के अद्भुत संगम का लोहा भी मनवाया। आज इस ऐतिहासिक मिशन की पहली वर्षगांठ पर उन जांबाज नायकों को याद किया जा रहा है, जिन्होंने अपनी सूझबूझ और फौलादी इरादों से पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया और दुनिया को दिखा दिया कि भारत अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
आसमान के सिकंदरों ने दुश्मन को घर में घेरा
भारतीय वायुसेना के जांबाज अधिकारियों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आसमान में अपनी शक्ति का ऐसा प्रदर्शन किया कि दुश्मन का रडार तंत्र पूरी तरह विफल हो गया। ग्रुप कैप्टन रंजीत सिंह सिद्धू और मनीष अरोड़ा जैसे जांबाजों ने रफाल और सुखोई विमानों के जरिए दुश्मन के एयरबेस को दहला दिया, जबकि ग्रुप कैप्टन अनिमेष पटनी ने एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के साथ विश्व रिकॉर्ड कायम करते हुए सैकड़ों किलोमीटर दूर से ही घुसपैठिए विमानों को मार गिराया। भारतीय वायुसेना ने रात के अंधेरे में बेहद नीची उड़ान भरकर न केवल दुश्मन के आतंकी ठिकानों को जमींदोज किया, बल्कि चीन द्वारा पाकिस्तान को उपलब्ध कराई जा रही जासूसी तकनीक और सैटेलाइट डेटा के जाल को भी अपनी रणनीतिक चतुराई से पूरी तरह नाकाम कर दिया।
पहाड़ियों पर गूंजी भारतीय तोपों की गर्जना
थल सेना की ओर से कर्नल कोषांक लांबा और लेफ्टिनेंट कर्नल सुशील बिष्ट ने दुर्गम चोटियों पर युद्ध की परिभाषा ही बदल दी, जहाँ चिनूक हेलीकॉप्टर्स और एम777 अल्ट्रा लाइट होवित्जर तोपों के मेल ने प्रलय मचा दिया। स्पेस टेक्नोलॉजी और सटीक सैटेलाइट डेटा का उपयोग करते हुए सेना ने आतंकियों के उन गुप्त ठिकानों को भी खोज निकाला जो घने जंगलों और गुफाओं में छिपे हुए थे। महज 23 मिनट की उस भीषण गोलाबारी ने सीमा पार बैठे आतंकियों के बुनियादी ढांचे को नक्शे से मिटा दिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि भारतीय सेना अब केवल रक्षात्मक नहीं बल्कि आक्रामक होकर दुश्मन को उसी की भाषा में जवाब देने की क्षमता रखती है।
तकनीक और जांबाजी के बेजोड़ तालमेल से मिली जीत
इस पूरे ऑपरेशन की सफलता का मुख्य आधार 'इंसान और मशीन' का वह घातक समन्वय था, जिसने पाकिस्तान की हर चाल को विफल कर दिया और उसे केवल चार दिनों के भीतर आत्मसमर्पण की स्थिति में ला खड़ा किया। स्क्वाडन लीडर रिजवान मलिक जैसे वीरों ने मिसाइल रेंज के भीतर जाकर जिस धैर्य के साथ सटीक हमले किए, वह सैन्य इतिहास में साहस का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। रक्षा मंत्रालय ने भी इस बात को रेखांकित किया है कि तीनों सेनाओं के बीच दिखा यह असाधारण तालमेल और स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों की अचूक मारक क्षमता ने भारत की सामरिक शक्ति को वैश्विक पटल पर एक नई ऊँचाई प्रदान की है, जिससे आज देश की सीमाएं पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और अभेद्य हैं।

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