नेतन्याहू ने किया साफ, ट्रंप से कोई तालमेल नहीं
यरूशलेम/वॉशिंगटन: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपने रणनीतिक व व्यक्तिगत संबंधों को लेकर एक बड़ा और बेहद बेबाक बयान दिया है। एक इंटरनेशनल पॉलिसी समिट को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि दोनों नेता हमेशा एक-दूसरे के फैसलों या बातों से पूरी तरह सहमत नहीं होते। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप वह सब कुछ नहीं करते जो मैं चाहता हूं, और न ही मैं वह सब कुछ करता हूं जो वे चाहते हैं।" नेतन्याहू का यह बयान साफ तौर पर दोनों देशों के बीच एक परिपक्व और संप्रभु साझेदारी को प्रदर्शित करता है।
नेतन्याहू की दोटूक और इजरायल-अमेरिका संबंधों की संप्रभुता
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने दोनों देशों की स्वतंत्रता पर जोर देते हुए कहा कि इजरायल और अमेरिका दो आजाद और स्वाभिमानी देश हैं, इसलिए रणनीतिक हितों के मेल खाने के बावजूद कई मुद्दों पर दोनों की राय अलग हो सकती है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायल लगातार हमास, हिज्बुल्लाह और ईरान समर्थित अन्य समूहों से कड़ी सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। हालांकि अमेरिका पारंपरिक रूप से इजरायल का सबसे बड़ा मददगार रहा है, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने हमेशा इजरायल की हर मांग को आंख मूंदकर स्वीकार नहीं किया है। ठीक इसी तरह, इजरायल भी अमेरिकी प्राथमिकताओं के दबाव में आए बिना अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार स्वतंत्र नीतियां तय करता आया है।
अमेरिका-ईरान के बीच 18 घंटे की मैराथन बातचीत
एक तरफ जहां इजरायल ने अमेरिका के साथ अपनी नीति स्पष्ट की है, वहीं मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) की भू-राजनीति में एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को कम करने के उद्देश्य से एक लंबी और गोपनीय वार्ता आयोजित की गई। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक, दोनों पक्षों के मुख्य वार्ताकार दलों के बीच पूरे 18 घंटे तक मैराथन कूटनीतिक बातचीत चली। इस बेहद संवेदनशील और जटिल बातचीत को सफल बनाने में कतर और पाकिस्तान ने मध्यस्थ (मिडिएटर) की अहम भूमिका निभाई है।
आगे का कूटनीतिक रोडमैप और ईरान की दो बड़ी शर्तें
इस महामंथन का मुख्य चरण फिलहाल समाप्त हो चुका है, लेकिन पर्दे के पीछे की कूटनीति अभी थमी नहीं है। प्रवक्ता ने साफ किया कि दोनों देशों की तकनीकी टीमें और विशेषज्ञ अगले चरण के विवरणों पर काम जारी रखेंगे। इस 18 घंटे की बातचीत में जिन बिंदुओं पर आम सहमति बनी है, उसकी पूरी रूपरेखा समेटे हुए मध्यस्थ देश कतर और पाकिस्तान जल्द ही एक संयुक्त लिखित दस्तावेज (आधिकारिक रिकॉर्ड) जारी करेंगे।
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि आगे की किसी भी शांति प्रक्रिया के लिए उसकी दो मुख्य शर्तों पर अमल होना अनिवार्य है:
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तेल बिक्री की अनुमति: ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाकर उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना तेल बेचने के लिए जरूरी कानूनी परमिट दिए जाएं।
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फ्रीज संपत्तियों की बहाली: अमेरिकी पाबंदियों के कारण दुनिया भर के विदेशी बैंकों में जमे (फ्रोजन एसेट्स) ईरान के अरबों डॉलर उसे तुरंत वापस सौंपे जाएं।
इन दोनों शर्तों पर अमेरिका का क्या रुख रहता है, इसी पर मध्य पूर्व का भविष्य और आगे की कूटनीति टिकी हुई है।

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