शिक्षकों की परीक्षा पर रोक लगाने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

छतरपुर। हाल ही में उच्चतम न्यायालय के आदेश पर उन पुराने शिक्षकों की परीक्षा आयोजित किए जाने के निर्देश दिए गए है जो बिना परीक्षा के शिक्षक के पद पर आए थे। व्यापम की पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर शिक्षक बने लोगों को इस परीक्षा से अलग रखा गया है शासकीय शिक्षक संगठन ने जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेज कर पात्रता परीक्षा के आदेश पर तुरंत रोक लगाने एवं उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया कि लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल द्वारा जारी आदेश में लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा अनिवार्य करने की बात कही गई है जिससे प्रदेश के शिक्षकों में असंतोष और रोष व्याप्त है। संगठन का कहना है कि नियुक्ति के समय सेवा शर्तों में टीईटी परीक्षा का कोई उल्लेख नहीं था और नियुक्ति के बाद सेवा शर्तों में बदलाव करना नियमों के विरुद्ध है। शिक्षकों ने यह भी कहा कि प्रदेश के अधिकांश शिक्षक पहले शिक्षाकर्मी और संविदा शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए थे, जिनकी सेवाएं निरंतरता में चली आ रही हैं। ऐसे में अब टीईटी परीक्षा लागू करना न्यायोचित नहीं है।
संगठन के पदाधिकारियों ने मांग की कि राज्य सरकार इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करे और संचालक लोक शिक्षण द्वारा जारी आदेश को तुरंत वापस लिया जाए। इस दौरान संगठन के वरिष्ठ प्रांतीय उपाध्यक्ष राजकुमार शर्मा, जिला अध्यक्ष अनुराग खरे, कार्यकारी जिला अध्यक्ष कमल अवस्थी,  एवं बड़ी संख्या में शिक्षक साथी उपस्थित रहे ।

न्यूज़ सोर्स : Mail