वैलेंटाइन डे पर 'प्रेम' की सबसे सुंदर तस्वीर: अपनी खुशियों के बीच 14 बेटियों का कन्यादान, शशिकांत अग्निहोत्री का अनूठा संकल्प...

छतरपुर। यह वाकई एक 'इश्क और इबादत' का अद्भुत संगम है। जहाँ दुनिया आज के दिन को सिर्फ व्यक्तिगत प्रेम के इजहार तक सीमित रखती है, वहीं बुंदेलखंड के इस युवा ने 'प्रेम' की परिभाषा को 'सेवा' से बदलकर एक नया इतिहास लिख दिया है।
छतरपुर के भाजपा युवा नेता शशिकांत अग्निहोत्री ने समाज के सामने मानवता की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती विद्या हरिओम अग्निहोत्री के सुपुत्र शशिकांत ने अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण दिन यानी अपनी शादी के रिसेप्शन को 'सेवा उत्सव' में बदल दिया है।
शशिकांत ने एक साहसिक और मर्मस्पर्शी निर्णय लिया— फिजूलखर्ची को तिलांजलि और 14 निर्धन कन्याओं का सामूहिक कन्यादान। आज 14 फरवरी को, जब शशिकांत अपनी नई जिंदगी की शुरुआत कर रहे हैं, उसी मंडप की गूँज और आशीर्वाद में 14 अन्य बेटियों के घर भी बस रहे हैं। यह महज एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन 14 पिताओं के स्वाभिमान को सहारा है जो अपनी बेटियों के हाथ पीले करने का सपना संजोए बैठे थे।
गौरतलब हो शशिकांत के पिता हरिओम, जो सहकारिता के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित नाम हैं, उनके स्पष्ट विचार इस पहल की नींव हैं। उनका मानना है कि— “ईश्वर ने यदि हमें देने लायक बनाया है, तो हमें समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व को समझना ही होगा।” पिता से मिली इसी सीख और माता के संस्कारों को शशिकांत ने अपने जीवन के सबसे बड़े पड़ाव पर चरितार्थ कर दिखाया है।
इश्क का इससे बड़ा इजहार और क्या होगा, कि अपनी शादी के जश्न में किसी और की जिंदगी को रोशन कर दिया जाए। शशिकांत और उनके परिवार की यह 'सराहनीय पहल' शब्दों की मोहताज नहीं है, यह तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक 'पावन संदेश' है।
निश्चित रूप से, आज वैलेंटाइन डे का सबसे हसीन तोहफा 14 फरवरी को छतरपुर की धरती (क्रिकेट स्टेडियम मुंगवारी) ऐतिहासिक और भावुक क्षण की साक्षी बनेगी, जहाँ एक ओर शशिकांत के दांपत्य जीवन की शुरुआत होगी, तो दूसरी ओर 14 बेटियाँ अपने नए जीवन में कदम रखेंगी।
इस नेक कार्य और शशिकांत जी के उज्ज्वल भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनाएं।

न्यूज़ सोर्स : Satyaexpress.com