बड़ामलहरा पुलिस पर लगे आरोप: हकीकत या एसडीएम की निजी खुन्नस?

जानिए क्या है फर्जी हस्ताक्षर और टाइपशुदा आवेदन का खेल

छतरपुर। आज छतरपुर जिले के बड़ामलहरा में एक चर्चा गर्म है, और वह यह कि क्या एक जिम्मेदार पद पर बैठे एसडीएम अपनी निजी खुन्नस निकालने के लिए पुलिस विभाग की छवि धूमिल कर सकते हैं? मामला वार्ड क्रमांक आठ और नौ में अवैध शराब बिक्री की शिकायत से जुड़ा है, जिसमें बीते रोज एसडीएम आयुष जैन द्वारा जारी एक पत्र ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया था। इस पत्र में दो आरक्षकों, सतीश यादव और सोनू यादव पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन अब इस पूरे मामले में एक ऐसा मोड़ आया है जिसने खुद एसडीएम की मंशा को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
दरअसल, इस पूरी कहानी की पोल तब खुली जब असली शिकायतकर्ता और सपा नेता भैय्यन यादव खुद सामने आए। भैय्यन यादव ने वार्डवासियों के साथ मिलकर अवैध शराब दुकान हटाने के लिए एक हस्तलिखित ज्ञापन एसडीएम और थाना प्रभारी को सौंपा था। लेकिन चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब सोशल मीडिया पर एसडीएम का एक टाइपशुदा पत्र वायरल हुआ, जिसमें आरक्षकों के नाम का उल्लेख करते हुए उन्हें शराब माफिया के साथ संलिप्त बताया गया। भैय्यन यादव ने बुधवार को एसडीओपी कार्यालय पहुंचकर अपने बयान दर्ज कराए और स्पष्ट कहा कि उन्होंने अपने आवेदन में किसी भी व्यक्ति का नाम नहीं लिखा था। उनका आरोप है कि एसडीएम कार्यालय से उनके असली हस्तलिखित आवेदन को बदलकर एक टाइप किया हुआ फर्जी आवेदन लगाया गया है, जिस पर उनके हस्ताक्षर भी फर्जी हैं।
साजिश का सबसे बड़ा प्रमाण उस टाइपशुदा आवेदन में नजर आता है, जिसमें एक ही व्यक्ति द्वारा कलम से हस्ताक्षर किए गए हैं और अंगूठे का निशान लगाया गया है। सपा नेता का कहना है कि यह पूरी कवायद उनके और पुलिस प्रशासन के बीच संबंध खराब करने और थाना प्रभारी सहित आरक्षकों को बदनाम करने की एक सोची-समझी साजिश है। सवाल यह उठता है कि अगर शिकायतकर्ता ने नाम नहीं दिया, तो एसडीएम के कार्यालय से जारी पत्र में आरक्षकों के नाम कैसे आए? क्या यह सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर किसी निजी रंजिश को भुनाने की कोशिश है?
फिलहाल यह मामला अब केवल शराब की शिकायत का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जालसाजी का बन गया है। अगर किसी एसडीएम स्तर के अधिकारी के कार्यालय में शिकायती पत्र बदल दिया जाता है और फर्जी हस्ताक्षर कर पुलिसकर्मियों को फंसाने की कोशिश होती है, तो यह गंभीर जांच का विषय है। अब गेंद वरिष्ठ अधिकारियों के पाले में है कि वे इस 'साजिशी खेल' के पीछे के असली चेहरों को बेनकाब करें। क्या पुलिस की छवि खराब करने की मंशा रखने वाले दोषियों पर कार्रवाई होगी, या मामला दबा दिया जाएगा?
एसडीएम बोले- पत्र कैसे वायरल हुआ है, मुझे नहीं पता?
हमारे कार्यालय से शासकीय पत्र जिसमें सिपाहियों के नाम लिखे गए हैं, वह पत्र एक शिकायत के आधार पर लिखा गया था। अब शिकायतकर्ताओं के दो पत्र सामने आ रहे हैं, एक पत्र में उन्होंने नाम लिखे थे और एक में नहीं लिखे थे। मेरी मंशा किसी को बदनाम करने की नहीं थी, यह पत्र मेरे कार्यालय से कैसे वायरल हुआ है, मुझे नहीं पता। मैं इसकी जांच के लिए एसडीओपी को लिख चुका हूं, मैं स्वयं भी जांच कराउंगा।
आयुष जैन, एसडीएम, बड़ामलहरा
एसडीएम के पत्र की कराई जा रही जांच
एसडीएम द्वारा वायरल कराए गए पत्र और मूल पत्र की जांच के लिए एसडीओपी को निर्देशित किया गया है। एसडीएम ने किस आधार पर पुलिस आरक्षकों के नाम लिखकर पत्र जारी करा दिया यह भी जांचा जा रहा है। यह प्रशासनिक पत्र की भाषा नहीं लग रही है। हम जांच कर रहे हैं।
अगम जैन, एसपी छतरपुर

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