मुख्यमंत्री डॉ. यादव मिले मॉक ड्रिल में घायल जवानों से
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मॉक ड्रिल के दौरान घायल हुए उपचाररत जवानों से शुक्रवार को अस्पताल पहुंचकर कुशलक्षेम पूछी। उन्होंने उनके उपचार की जानकारी भी डॉक्टर्स से ली। क्षेत्रीय विधायक रामेश्वर शर्मा भी साथ थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घायल जवानों संतोष कुमार और विशाल सिंह से चर्चा कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अस्पताल के चिकित्सकों को इन जवानों का समुचित उपचार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत हुई तो इन जवानों को उच्च चिकित्सा संस्थान में भी भिजवाएं। चिकित्सकों ने बताया कि जवानों का इसी अस्पताल में समुचित उपचार हो जाएगा। घायल जवानों में कांस्टेबल संतोष कुमार को आंख में गंभीर चोट आई है और हेड कांस्टेबल विशाल सिंह भी चोटिल है। दोनों का सघन चिकित्सा कक्ष में इलाज चल रहा है। यह दोनों जवान सीटीजी होप फोर्स के सदस्य हैं और 25वीं बटालियन में पदस्थ हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घायल जवानों के परिजनों से भी मुलाकात की और उन्हें सांत्वना देखकर कहा कि दोनों जवानों के बेहतर इलाज के लिए सभी प्रबंध किए जाएंगे। चिंता की कोई बात नहीं है। जवानों का हर संभव इलाज कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घटना की जांच के निर्देश भी दिये हैं।
जयप्रकाश लखेरा और इनके परिजन से भी मिले मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाणगंगा चौराहे पर विगत दिवस हुई सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल जय प्रकाश लखेरा से भी अस्पताल में मुलाकात की। उन्होंने लखेरा को आश्वस्त किया कि उनका समुचित इलाज कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लखेरा के परिजनों को भी आश्वस्त किया कि इलाज में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।

70 साल के हाजी खलील ने चौथा निकाह कर फिर मचाई चर्चा
United States का Beijing पर दबाव, टैरिफ पर सख्त रुख
कार्यकर्ताओं पर भी कार्रवाई होगी, भाजपा ने दिए कड़े संकेत
मुख्यमंत्री के 'सुशासन' संकल्प से आ रहा बदलाव
एक्सप्रेसवे पर भीषण सड़क हादसा, ओवरटेक के दौरान 5 लोगों की दर्दनाक मौत
अधिक वजन वाली महिलाओं में बढ़ता है फाइब्रॉइड का खतरा
चुनाव नतीजों के बाद Mamata Banerjee का बयान—“हम हारे नहीं, हराए गए”
कागजों में बच्चों का पोषण, जमीन पर भ्रष्टाचारियों का राशन पर डाका
Dhar में दर्दनाक मामला, प्लास्टिक बैग में मिली बच्ची की लाश
सपनों को मिले पहिए : भीमा मारकंडे की 'बैसाखी' से 'आत्मनिर्भरता' तक की प्रेरक यात्रा