अंधेरों से उजालों तक: हनुमान टौरिया में मिशन रोशनी का करुणामय संकल्प
*अंधेरों से उजालों तक: हनुमान टौरिया में मिशन रोशनी का करुणामय संकल्प*
*एक दिवसीय निःशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर सम्पन्न, 200 से अधिक गरीब-असहाय मरीजों की जांच — 40 मोतियाबिंद पीड़ितों को मिलेगी पुनः दृष्टि का वरदान*
✍🏻 सत्यनिधि त्रिपाठी (संजू)
*सत्य एक्सप्रेस*
छतरपुर। जब सेवा केवल आयोजन न रहकर संवेदना का उत्सव बन जाए, जब किसी दिवंगत आत्मा की स्मृति लोककल्याण का माध्यम बनकर जनमानस में प्रकाश बिखेरे, तब ऐसे प्रयास केवल कार्यक्रम नहीं बल्कि मानवता के इतिहास में दर्ज होने वाली पुण्य गाथाएं बन जाते हैं। नगर के प्राचीन एवं आस्था के केंद्र हनुमान टौरिया मंदिर परिसर में रविवार को ऐसा ही भावपूर्ण दृश्य देखने को मिला, जब मिशन रोशनी के अंतर्गत एक दिवसीय निःशुल्क नेत्र परीक्षण एवं मोतियाबिंद चयन शिविर का सफल आयोजन किया गया।
यह शिविर स्वर्गीय अशोक असाटी की पावन स्मृति में उनके चाचा श्री राधेलाल असाटी तथा पुत्र शिवांक असाटी के विशेष सहयोग से आयोजित हुआ, जिसने सैकड़ों जरूरतमंदों के जीवन में आशा की नई किरण जगा दी।
*दीप प्रज्वलन के साथ आरंभ हुआ सेवा का पावन अनुष्ठान*
कार्यक्रम का शुभारंभ उपस्थित अतिथियों द्वारा हनुमान जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। वातावरण में भक्ति, सेवा और समर्पण का अद्भुत संगम दिखाई दे रहा था। मंदिर परिसर में सुबह से ही दूर-दराज़ से आए वृद्ध, महिलाएं, श्रमिक, किसान और जरूरतमंद मरीजों की लंबी कतारें लग गई थीं—मानो सबकी आंखों में केवल उपचार ही नहीं, बल्कि जीवन को फिर से साफ़ देखने की उम्मीद तैर रही हो।
समिति की सक्रिय सदस्य गिरजा पाटकर ने जानकारी देते हुए बताया कि मिशन रोशनी का उद्देश्य उन लोगों तक नेत्र चिकित्सा पहुंचाना है, जिनके लिए इलाज का खर्च आज भी एक असंभव सपना है।
*चित्रकूट से पहुंचे विशेषज्ञ चिकित्सक, सैकड़ों ने पाया उपचार*
शिविर में सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय, चित्रकूट से आए वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ डॉ. अरविंद मिश्रा एवं उनकी टीम ने मरीजों की गहन जांच की।
शिविर में लगभग 200 से अधिक गरीब एवं असहाय नेत्र रोगियों का परीक्षण किया गया, जबकि बड़ी संख्या में आए मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श, आवश्यक दवाइयां तथा जरूरतमंदों को निःशुल्क चश्मे भी वितरित किए गए।
नेत्र रोग से जूझ रहे अनेक बुजुर्गों के चेहरों पर उस समय सुकून झलक उठा जब चिकित्सकों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि अब उनकी धुंधली दुनिया फिर साफ़ हो सकेगी।
*40 मोतियाबिंद मरीजों को मिला नई जिंदगी का भरोसा*
शिविर का सबसे भावुक और आश्वस्तकारी पक्ष यह रहा कि जांच के दौरान 40 मरीज मोतियाबिंद ऑपरेशन हेतु चिन्हित किए गए, जिन्हें उसी दिन चित्रकूट स्थित सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय भेज दिया गया।
इन सभी मरीजों का निःशुल्क ऑपरेशन कर उन्हें पुनः दृष्टि प्रदान की जाएगी।
दरअसल, जिन आंखों ने वर्षों से धुंधलके को ही नियति मान लिया था, उन आंखों के लिए यह शिविर सचमुच पुनर्जन्म जैसा अवसर सिद्ध हुआ।
*सहयोगियों ने निभाई सेवक की भूमिका, नहीं दिखा औपचारिकता का भाव*
आयोजन की आत्मा बने राधेलाल असाटी और शिवांक असाटी ने केवल आर्थिक सहयोग तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि पूरे समय शिविर में उपस्थित रहकर मरीजों के रजिस्ट्रेशन से लेकर भोजन वितरण तक की जिम्मेदारी अपने हाथों से निभाई।
गरीब, वृद्ध और असहाय मरीजों को ससम्मान बैठाकर भोजन कराना, उनकी पर्चियां बनवाना और जांच तक पहुंचाना—यह दृश्य आयोजन को विशुद्ध मानवीय संवेदना का रूप दे रहा था।
सेवा के इस विनम्र भाव ने उपस्थित लोगों के मन में गहरा सम्मान उत्पन्न किया।
*16 वर्षों की अखंड सेवा यात्रा: एक लाख से अधिक मरीजों तक पहुंची रोशनी*
हनुमान टौरिया सेवा समिति द्वारा संचालित यह शिविर कोई एक दिन की परिकल्पना नहीं, बल्कि पिछले 16 वर्षों से निरंतर चल रही मानवसेवा की अखंड साधना है।
यह इस वर्ष का चौथा शिविर था।
*समिति के अनुसार अब तक*
*👁️1 लाख से अधिक नेत्र रोगी इन शिविरों से लाभान्वित हो चुके हैं*
*👁️25 हजार से अधिक मरीजों का सफल मोतियाबिंद उपचार कराया जा चुका है*
यह आंकड़ा केवल संख्या नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की मुस्कान है जिनके घरों में फिर से उजाला लौटा है।
*जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों की रही गरिमामयी उपस्थिति*
इस सेवा यज्ञ में अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से
भारतीय जनता पार्टी जिला महामंत्री विवेक उप्पल,
उपाध्यक्ष अशोक दुबे,
उपाध्यक्ष विनय पटेरिया,
समाजसेवी राधेलाल असाटी,
वरिष्ठ पत्रकार हरिप्रकाश अग्रवाल,
अन्नपूर्णा रामलीला समिति अध्यक्ष द्रगेंद्र देव सिंह, प्रभा वैद्य, गौसेवक बृजेश पालीवाल, अमन दुबे सहित अन्य अतिथि शामिल रहे।
वहीं आयोजन को सफल बनाने में समिति के लालजी पाटकर, हरि अग्रवाल, गिरजा पाटकर, नारायण मिश्रा, आशीष शर्मा, डीसी पाठक, नीरज खरे, नीलम तिवारी, मीना दुबे, प्रद्युम्न गुप्ता, लखन सोनी, रमेश खरे, प्रिंस गुप्ता, मयंक नामदेव, राजकुमार वर्मा, बाबू सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
*जहां सेवा है, वहीं सच्चा देवत्व है*
हनुमान टौरिया की पावन पहाड़ी पर आयोजित यह शिविर केवल नेत्र परीक्षण का कार्यक्रम नहीं था यह उन आंखों में विश्वास जगाने का प्रयास था जो गरीबी के कारण उपचार से वंचित थीं।
यह उस विचार का जीवंत उदाहरण था कि समाज यदि चाहे तो किसी भी अभावग्रस्त जीवन में रोशनी पहुंचा सकता है।
*स्व. अशोक असाटी की स्मृति में किया गया यह पुनीत आयोजन यह संदेश देकर गया कि मनुष्य देह भले नश्वर हो, किंतु उसके नाम पर की गई सेवा उसे अमर बना देती है।*

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