पेट खराब होने पर मूंग दाल क्यों है बेस्ट? पाचन से लेकर रिकवरी तक फायदे
हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि पेट की खराबी लगातार कई दिनों तक बनी रहे, या फिर मरीज को तेज बुखार हो, मल में खून आने की शिकायत हो अथवा लगातार उल्टियां हो रही हों, तो ऐसी स्थिति में केवल घरेलू उपायों या डाइट प्लान पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। इन गंभीर लक्षणों के दिखते ही तुरंत किसी योग्य डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर मूंग दाल पेट के लिए इतनी गुणकारी क्यों है और अस्वस्थ होने पर इसे किस तरह खाना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है।
जानिए पेट खराब होने पर मूंग दाल का सेवन करने के 4 मुख्य वैज्ञानिक कारण
1. बेहद सुपाच्य और हल्की होती है
मूंग की दाल को दुनिया की सबसे हल्की और सुपाच्य दालों में गिना जाता है। इसमें पाए जाने वाले प्रोटीन्स और कार्बोहाइड्रेट्स को हमारा संवेदनशील पाचन तंत्र बिना किसी मशक्कत के बहुत आसानी से पचा लेता है। पेट खराब होने की स्थिति में आंतें पहले से ही संवेदनशील होती हैं, ऐसे में भारी, तला-भुना या अत्यधिक मसालेदार भोजन स्थिति को और बिगाड़ सकता है। मूंग दाल पेट को राहत देती है और डाइजेशन प्रोसेस को बिल्कुल स्मूथ रखती है। यही वजह है कि डायटिशियन भी इस दौरान सादी पीली मूंग दाल या इसकी खिचड़ी खाने की वकालत करते हैं।
2. प्लांट-बेस्ड प्रोटीन और आवश्यक मिनरल्स का बेहतरीन स्रोत
लगातार दस्त या उल्टी होने से शरीर का सारा न्यूट्रिशन बाहर निकल जाता है और भयंकर कमजोरी आ जाती है। शरीर की कोशिकाओं (सेल्स) की मरम्मत और मांसपेशियों को तुरंत ताकत देने के लिए प्रोटीन की जरूरत होती है। मूंग दाल पौधों से मिलने वाले शुद्ध प्रोटीन का सबसे अच्छा जरिया है। इसके अलावा, इसमें प्रचुर मात्रा में फोलेट, मैग्नीशियम, पोटैशियम और आयरन जैसे माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स होते हैं, जो शरीर की खोई हुई ऊर्जा को वापस लाते हैं। कम तेल-मसाले में बनी यह दाल पोषण का पावरहाउस मानी जाती है।
3. संवेदनशील आंतों को देती है तुरंत आराम
बीमारी के दिनों में सादा भोजन ही शरीर के लिए दवा का काम करता है। मूंग की पतली दाल या चावल के साथ मिलाकर बनाई गई गीली खिचड़ी न केवल गले से आसानी से नीचे उतरती है, बल्कि आंतों की सूजन को कम कर पेट को भीतर से ठंडक और आराम पहुंचाती है। मसाले न होने के कारण लिवर और पेट को इसे पचाने के लिए एक्स्ट्रा मेहनत नहीं करनी पड़ती, जिससे शरीर अपनी पूरी ऊर्जा बीमारी से लड़ने में लगा पाता है।
4. पेट फूलने, गैस और अपच की समस्या से बचाव
अक्सर देखा जाता है कि चना, राजमा, छोले या उड़द जैसी भारी दालें खाने से आम दिनों में भी पेट में गैस और ब्लोटिंग (पेट फूलना) की समस्या हो जाती है। इसके विपरीत, मूंग दाल की प्रकृति बेहद ठंडी और हल्की होती है, जिससे पेट में गैस बनने की संभावना न के बराबर होती है। खासकर जब इसे अच्छी तरह गलाकर और हींग-जीरे के हल्के तड़के के साथ पकाया जाए। हालांकि, यदि किसी दुर्लभ मामले में किसी व्यक्ति को मूंग दाल से भी पेट में भारीपन लगे, तो उन्हें तुरंत किसी डाइट एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए।
पेट की खराबी के दौरान मूंग दाल को डाइट में कैसे शामिल करें?
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सादी मूंग दाल की पतली खिचड़ी: चावल और मूंग दाल को बराबर मात्रा में लेकर ज्यादा पानी के साथ एकदम घुली हुई खिचड़ी बनाएं।
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कम मसालों का सूप या पतली दाल: बिना गाढ़ेपन के, पानी की मात्रा अधिक रखकर मूंग दाल का सूप बनाकर पिएं।
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उबले चावल के साथ सादी दाल: यदि खिचड़ी पसंद न हो, तो पूरी तरह उबले हुए नर्म चावल के साथ इसे खाया जा सकता है।
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शून्य तीखापन: बनाने के दौरान लाल मिर्च, गरम मसाला या हैवी तड़के का प्रयोग बिल्कुल न करें।
शीघ्र स्वस्थ होने के लिए इन महत्वपूर्ण बातों का रखें विशेष ध्यान
भोजन पकाने में घी, तेल और हैवी मसालों का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दें।
शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) से बचने के लिए लगातार साफ पानी, नारियल पानी या ओआरएस (ORS) का घोल पीते रहें।
बाहर के जंक फूड, डिब्बाबंद जूस और तली-भुनी चीजों से सख्त परहेज करें।
यदि समस्या 24 से 48 घंटे के भीतर नियंत्रित न हो, तो बिना समय गंवाएं नजदीकी अस्पताल या डॉक्टर से संपर्क करें।

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