सरकारी अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना पर घोटाले की छाया, ऑडिट रिपोर्ट से खुली बड़ी गड़बड़ी
बलरामपुर: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के राजपुर से स्वास्थ्य विभाग के माथे पर कलंक लगाने वाला एक बेहद सनसनीखेज और बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। केंद्र सरकार की सबसे कल्याणकारी और महत्वाकांक्षी 'आयुष्मान भारत योजना' के तहत मिलने वाली विकास राशि में करोड़ों रुपये की भारी हेराफेरी का भंडाफोड़ हुआ है। इस पूरे महाघपले का खुलासा महालेखाकार (AG) की विशेष ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है, जिसके बाद विभाग में हड़कंप मच गया है।
महालेखाकार की टीम ने इस गंभीर वित्तीय अनियमितता को पकड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार शीर्ष अधिकारियों को कड़ा पत्र जारी कर इस पर तत्काल स्पष्टीकरण और जवाब मांगा है। यदि सही तरीके से जांच आगे बढ़ी, तो कई बड़े चेहरों का बेनकाब होना तय माना जा रहा है।
कागजों पर ही चमका दिया अस्पताल; धरातल पर शून्य और चहेती फर्म 'सारिका एसोसिएट' को कर दिया लाखों का भुगतान
ऑडिट रिपोर्ट से जो चौंकाने वाली कड़ियां सामने आई हैं, वे यह दर्शाती हैं कि किस तरह सरकारी धन को दीमक की तरह चाटा गया है:
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कागजी विकास का खेल: साल 2022 से लेकर 2025 के बीच राजपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के बुनियादी ढांचे के विकास और मरीजों की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए आयुष्मान भारत योजना के मद से लगभग 2 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि आवंटित की गई थी। लेकिन जब महालेखाकार की उच्च स्तरीय ऑडिट टीम इस भारी राशि से हुए कार्यों का भौतिक सत्यापन (जांच) करने जमीन पर पहुंची, तो वहां विकास के नाम पर एक ईंट तक नहीं रखी गई थी। पूरा विकास कार्य सिर्फ और सिर्फ फाइलों और कागजों में ही पूरा दिखा दिया गया था।
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कर्मचारी के रिश्तेदार की फर्म को फायदा: जांच में यह बेहद गंभीर तथ्य सामने आया है कि इस अस्पताल में कार्यरत एक रसूखदार स्वास्थ्य कर्मचारी के बेहद नजदीकी रिश्तेदार की 'सारिका एसोसिएट्स' नामक एक निजी फर्म है। नियमों को ताक पर रखकर इस फर्म को बिना काम किए ही लाखों रुपये का अग्रिम भुगतान कर दिया गया, जबकि भौतिक रूप से वहां कोई काम हुआ ही नहीं था। महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, प्राथमिक तौर पर ही करीब 1 करोड़ 62 लाख रुपये की सीधी गड़बड़ी और गबन पाया गया है।
बिना टेंडर के 5 लाख का फायर सिस्टम 36 लाख में खरीदा; जीवनदीप समिति को भी रखा अंधेरे में
अस्पताल के भीतर लूट-खसोट की हदें यहीं पार नहीं हुईं। ऑडिट में अन्य मदों में भी हैरान करने वाले बिल और भुगतान पाए गए हैं:
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फायर सेफ्टी में बड़ा फर्जीवाड़ा: अस्पताल में आगजनी की घटनाओं से निपटने के लिए लगाए जाने वाले सामान्य फायर फाइटिंग सिस्टम के नाम पर सीधे 36 लाख रुपये का खर्च दिखा दिया गया। तकनीकी जानकारों के अनुसार, जो फायर सिस्टम वहां लगाया गया है, उसकी वास्तविक बाजार कीमत अधिकतम 4 से 5 लाख रुपये से ज्यादा नहीं है।
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नियमों की अनदेखी: इतने बड़े खर्च के लिए न तो कोई सरकारी टेंडर (निविदा) आमंत्रित किया गया और न ही कोई पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई। अपनी पसंदीदा वेंडर कंपनी को सीधे लाखों रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। इसके अलावा, अस्पताल के रख-रखाव के लिए बनी 'जीवनदीप समिति' की अनिवार्य बैठकों के बिना और समिति के सदस्यों को पूरी तरह अंधेरे में रखकर लाखों रुपये की हेराफेरी की गई, जो सीधे तौर पर एक सुनियोजित वित्तीय अपराध की ओर इशारा करता है।
तबादले के बाद भी नए स्टेशन पर नहीं गए तत्कालीन बीएमओ डॉ. राम प्रसाद तिर्की; रसूखदारों का संरक्षण!
जिस समय राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इस करोड़ों रुपये के घोटाले की पटकथा लिखी जा रही थी, उस वक्त वहां के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) के पद पर डॉ. राम प्रसाद तिर्की तैनात थे। इस ऑडिट रिपोर्ट के लीक होने के बाद सरकार ने आनन-फानन में उनका ट्रांसफर सूरजपुर जिले के सुदूर चांदनी बिहारपुर क्षेत्र में कर दिया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि डॉ. तिर्की ने हफ्तों बीत जाने के बाद भी सरकारी आदेश को ठेंगे पर रख रखा है और नई जगह पर ज्वाइन नहीं किया है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इतने बड़े भ्रष्टाचार की पोल खुलने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी मौन साधे हुए हैं। आखिर क्या वजह है कि सरकार के आदेश की अवहेलना करने वाले और करोड़ों के घोटाले के संदिग्ध अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच या निलंबन जैसी सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है? चर्चा है कि उक्त अफसर को जिले के कुछ रसूखदार राजनेताओं और शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों का खुला संरक्षण प्राप्त है।
सीएमएचओ ने साधी चुप्पी; महालेखाकार ने दिए रिकवरी और एफआईआर के सख्त निर्देश
इस पूरे गंभीर विषय पर जब बलरामपुर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) विजय सिंह से बात की गई, तो उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की:
"कुछ महीने पहले महालेखाकार की टीम ने राजपुर अस्पताल का ऑडिट जरूर किया था। लेकिन ऑडिट में क्या विसंगतियां या गड़बड़ियां पाई गई हैं, उसकी आधिकारिक रिपोर्ट अभी तक मेरे कार्यालय को प्राप्त नहीं हुई है। जैसे ही रिपोर्ट हमारे पास आएगी, हम संबंधितों से जवाब मांगेंगे और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे।"
दूसरी तरफ, महालेखाकार कार्यालय के वरिष्ठ ऑडिट अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच में पाई गई भारी अनियमितताओं की पूरी रिपोर्ट और रिकवरी (वसूली) का सख्त पत्र सीएमएचओ कार्यालय को बहुत पहले ही भेजा जा चुका है। पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि गबन की गई राशि की तत्काल रिकवरी की जाए और संबंधितों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाए। आयुष्मान भारत जैसी गरीबों की संजीवनी योजना में हुए इस बड़े डाके ने छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य प्रणाली की पारदर्शिता पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।

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