जाप माला में 108 दाने ही क्यों होते हैं? जानें शास्त्रों में क्या है इसका महत्व
ज्यादातर भारतीय घरों में मंत्र जाप करने की 108 दानों वाली पवित्र माला मिल जाती है, जिससे घर के सदस्य ईश्वर का ध्यान और जाप करते हैं. सनातन धर्म में जाप माला का विशेष महत्व माना गया है. पूजा-पाठ, मंत्र जाप और ध्यान के दौरान अधिकतर लोग 108 दानों वाली माला का उपयोग करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर माला में 108 ही दाने क्यों होते हैं? इसके पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण भी बताए गए हैं. आइए जानते हैं 108 संख्या का महत्व और इससे जुड़े रोचक रहस्य.
108 संख्या पूर्णता का प्रतीक
धार्मिक मान्यता के अनुसार 108 संख्या को अत्यंत शुभ और पूर्णता का प्रतीक माना गया है. हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में 108 उपनिषदों का उल्लेख मिलता है. वहीं भगवान के 108 नामों का जाप करने की परंपरा भी सदियों से चली आ रही है. माना जाता है कि 108 बार किसी मंत्र का जाप करने से साधक की प्रार्थना अधिक प्रभावी होती है और मन एकाग्र होता है.
ज्योतिष शास्त्र में 108 का महत्व
ज्योतिष शास्त्र में भी 108 संख्या का विशेष महत्व बताया गया है. 12 राशियों और 9 ग्रहों का गुणनफल 108 होता है. इसी प्रकार 27 नक्षत्र और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं. 27 × 4 का परिणाम भी 108 आता है. इसलिए यह संख्या संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है.
आध्यात्मिक परंपराओं में 108 का महत्व
योग और आध्यात्मिक परंपराओं के अनुसार मानव शरीर में अनेक ऊर्जा केंद्र और नाड़ियां होती हैं. माना जाता है कि हृदय से निकलने वाली प्रमुख ऊर्जा नाड़ियों का संबंध 108 महत्वपूर्ण बिंदुओं से होता है. इसलिए 108 बार मंत्र जाप करने से मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने में सहायता मिलती है.
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से 108 संख्या स्पेशल
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी 108 संख्या को विशेष माना जाता है. कुछ विद्वानों के अनुसार पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा की दूरियों तथा उनके व्यास के अनुपात में भी 108 के आसपास का संबंध देखने को मिलता है. हालांकि इसे धार्मिक मान्यताओं का प्रत्यक्ष वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जाता, लेकिन यह संख्या प्रकृति और ब्रह्मांड से जुड़े कई रोचक तथ्यों के कारण चर्चा में रहती है.
जानें क्या है गुरु दाना?
जाप माला में 108 दानों के अलावा एक अतिरिक्त दाना भी होता है, जिसे सुमेरु या गुरु दाना कहा जाता है. मंत्र जाप करते समय इस दाने को पार नहीं किया जाता. जब जाप पूरा हो जाता है, तो माला को पलटकर फिर से जाप शुरू किया जाता है. यह परंपरा गुरु के सम्मान और विनम्रता का प्रतीक मानी जाती है.

आज इन 5 जिलों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी, इंदौर-भोपाल में भी बरसेंगे बादल
कच्चा तेल, बॉन्ड यील्ड और ग्लोबल संकेतों से बाजार पर दबाव, निवेशक क्या करें?
लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक टली, राज्यसभा में पेपर लीक पर जोरदार हंगामा
'इस्तीफे से कम कुछ मंजूर नहीं', सरकार और CJP के बीच आज निर्णायक वार्ता
नए परमाणु सहयोग समझौते से मचा बवाल, अमेरिका-सऊदी डील पर उठे सवाल
भारत-अफगानिस्तान टी20 सीरीज का अनोखा नजारा, दिल्ली में अफगानिस्तान होगा मेजबान
फर्जी किसान क्रेडिट कार्ड लोन पर विधानसभा में हंगामा, जांच की मांग तेज
स्विगी के शेयरों पर दबाव, कंपनी के बड़े ऐलान के बाद निवेशकों ने बेचे स्टॉक
इतिहास रचते हुए श्रेयस अय्यर ने धोनी को पीछे छोड़ा, पहली जीत की हर ओर चर्चा
फैक्ट चेक: छात्र आंदोलन पर विराट कोहली के बयान की सच्चाई और अन्य एथलीट्स का रुख