बारिश ने खोली व्यवस्था की हकीकत, गंदे पानी से लबालब हुई सड़कें
जबलपुर:मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में मानसून की शुरुआती फुहारों ने ही नगर निगम के विकास और जल निकासी के दावों की हवा निकाल दी है। शहर के लाल बहादुर शास्त्री वार्ड और ठक्कर ग्राम वार्ड में महज 15 मिनट की तेज बारिश के बाद जो तस्वीरें सामने आईं, उसने प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। इन दोनों ही प्रमुख वार्डों की मुख्य सड़कों और गलियों में नालों का गंदा और बदबूदार पानी ओवरफ्लो होकर जमा हो गया, जिससे स्थानीय जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। पहली ही सीमित बारिश में सड़कों के तालाब में तब्दील हो जाने से नगर निगम की कार्यप्रणाली और मानसून पूर्व की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
समय पर सफाई न होने से घरों तक पहुंचा गंदा पानी
स्थानीय निवासियों का सीधा आरोप है कि नगर निगम के स्वास्थ्य और लोक निर्माण विभाग द्वारा समय रहते बड़े और छोटे नालों की मुस्तैदी से सफाई नहीं कराई गई। नालों में जमा कचरे और सिल्ट (कीचड़) के कारण पानी की निकासी पूरी तरह अवरुद्ध हो गई, जिसके चलते महज कुछ ही मिनटों की बारिश का पानी सड़कों पर उफनने लगा। कई निचले इलाकों में तो यह गंदा पानी लोगों के घरों और दुकानों के भीतर तक प्रवेश कर गया, जिससे नागरिकों का घरेलू सामान खराब हो गया। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि प्रशासन द्वारा हर साल स्वच्छता और बुनियादी ढांचे के विकास पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल जुदा है।
कागजी दावों और फोटो खिंचवाने की राजनीति पर आक्रोश
दोनों वार्डों के आक्रोशित नागरिकों ने अब प्रशासन से मांग की है कि इस सीजन में नाला सफाई के नाम पर किए गए कार्यों की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। स्थानीय प्रबुद्ध जनों का आरोप है कि ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के कारण धरातल पर कोई ठोस काम नहीं हुआ है। सफाई के नाम पर केवल कुछ चुनिंदा जगहों की फोटो खिंचवाकर कागजी खानापूर्ति कर ली गई और बजट को ठिकाने लगा दिया गया। जनता ने चेतावनी दी है कि जब तक इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय कर उन पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है।
स्वच्छता अभियान की विफलता और स्थाई समाधान की मांग
सड़कों पर बहता नालों का गंदा पानी न सिर्फ यातायात को प्रभावित कर रहा है, बल्कि यह शहर में चल रहे स्वच्छता अभियान की विफलता को भी साफ तौर पर उजागर कर रहा है। बारिश के पानी के साथ बहकर आई गंदगी के कारण अब पूरे इलाके में संक्रामक बीमारियों और महामारी फैलने का खतरा मंडराने लगा है। नागरिकों का कहना है कि नगर निगम को हर साल बारिश के समय आनन-फानन में की जाने वाली अस्थाई व्यवस्था को बंद करना चाहिए। इसके बजाय, शहर के बढ़ते दायरे और आबादी को ध्यान में रखते हुए जल निकासी (ड्रेनेज सिस्टम) के लिए एक स्थाई और ठोस मास्टर प्लान तैयार करने की अत्यंत आवश्यकता है, ताकि भविष्य में आम जनता को इस तरह के नारकीय हालातों से मुक्ति मिल सके।

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