सिर्फ 3 कोचिंग के पास फायर NOC, ग्वालियर में छात्रों की सुरक्षा भगवान भरोसे
ग्वालियर। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुए भीषण कोचिंग अग्निकांड के बाद भी ग्वालियर का प्रशासनिक अमला और कोचिंग संचालक गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। शहर के अलग-अलग इलाकों में सैकड़ों की संख्या में कोचिंग सेंटर्स धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर स्थानों पर आग बुझाने के पुख्ता इंतजाम ही नहीं हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पूरे शहर में सिर्फ तीन कोचिंग संस्थानों के पास ही नगर निगम से जारी फायर एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) है। बाकी के संस्थानों में न तो फायर फाइटिंग सिस्टम काम कर रहे हैं और न ही सुरक्षा के कोई अन्य प्रबंध किए गए हैं।
दिखावे की कार्रवाई और अधिकारियों की लापरवाही
यह पूरी हकीकत नगर निगम के अधिकारियों की जानकारी में भी है, लेकिन रसूख और लापरवाही के चलते इन खतरनाक संस्थानों के खिलाफ कोई ठोस या प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। अमूमन देखा जाता है कि जब देश में कहीं आग लगने का कोई बड़ा हादसा होता है, तब निगम का फायर अमला कुछ दिनों के लिए नींद से जागता है और जांच अभियान का दिखावा शुरू कर देता है। लेकिन जैसे ही दिन बीतते हैं, यह अभियान पूरी तरह ठंडा पड़ जाता है। लखनऊ हादसे में 15 छात्रों की मौत के बाद भी ग्वालियर के जिम्मेदार अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं और शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं।
संकरी सीढ़ियां और सिंगल एग्जिट से बढ़ा खतरा
शहर के अधिकांश कोचिंग संस्थान ऐसे भवनों में चल रहे हैं जो सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाते हैं। इसके लिए जितना जिम्मेदार प्रशासन है, उतने ही लापरवाह अभिभावक भी हैं, जो सिर्फ कोचिंग की लोकप्रियता और उसका रिजल्ट देखकर बच्चों का दाखिला करा देते हैं, लेकिन बिल्डिंग की सुरक्षा को नजरअंदाज कर देते हैं। इन कोचिंगों में बेहद संकरी सीढ़ियां, बाहर निकलने का सिर्फ एक सीमित मार्ग (सिंगल एग्जिट), कमरों में लकड़ी के पार्टिशन और क्षमता से अधिक बच्चों की भीड़भाड़ है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में यह लापरवाही एक बड़े और जानलेवा खतरे को दावत दे रही है। खुद प्रशासन के पास भी शहर में चल रहे सभी कोचिंग संस्थानों का कोई सटीक और समग्र रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
10 दिनों से ठप पड़ा है जांच अभियान
पूर्व में दिल्ली के एक होटल में लगी आग के बाद नगर निगम की टीम ने शहर के कमर्शियल कॉम्प्लेक्सों, होटलों और कोचिंग सेंटर्स की जांच की थी। इस दौरान सिटी सेंटर स्थित एक नामी कोचिंग में फायर फाइटिंग सिस्टम बंद मिला और उसकी एनओसी की अवधि भी समाप्त हो चुकी थी, जिस पर कार्रवाई करते हुए डायरेक्टर का केबिन सील किया गया था। इसके बाद गत 12 जून को टोपी बाजार और मोर बाजार के कुछ प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई, लेकिन पिछले 10 दिनों से यह पूरा जांच अभियान पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है।
अधिकारी का बयान:
"नगर निगम द्वारा विभिन्न संस्थानों में फायर सिस्टम की लगातार जांच की जा रही है। आगे भी ऐसे सभी संवेदनशील कोचिंग और व्यावसायिक संस्थानों में टीम भेजकर फायर सेफ्टी के नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
— संघ प्रिय, आयुक्त, नगर निगम ग्वालियर

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