छतरपुर मेडिकल कॉलेज के नामकरण पर घमासान, महाराजा छत्रसाल, स्व. जे.पी. निगम और डॉ. बी.डी. चौरसिया के नामों पर तेज हुई बहस
छतरपुर मेडिकल कॉलेज के नामकरण पर घमासान, महाराजा छत्रसाल, स्व. जे.पी. निगम और डॉ. बी.डी. चौरसिया के नामों पर तेज हुई बहस
युवाओं की पहली पसंद महाराजा छत्रसाल, समर्थकों की मांग स्व. जे.पी. निगम के नाम पर; प्रबुद्ध वर्ग और चिकित्सक समुदाय में डॉ. बी.डी. चौरसिया के पक्ष में बन रही सहमति
सत्यनिधि त्रिपाठी (संजू)
छतरपुर में नवस्थापित मेडिकल कॉलेज के नामकरण को लेकर जिले में बहस तेज हो गई है। शहर और जिले के विभिन्न वर्गों में इस विषय पर अलग-अलग राय सामने आ रही है। एक ओर कुछ लोग मेडिकल कॉलेज का नाम पूर्व विधायक स्वर्गीय जे.पी. निगम के नाम पर रखने की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर बड़ी संख्या में युवा इसे बुंदेलखंड के गौरव महाराजा छत्रसाल को समर्पित करने की पैरवी कर रहे हैं। वहीं, इन दोनों नामों के बीच अब जिले के प्रबुद्ध वर्ग, बुजुर्गों, शिक्षाविदों और युवा वर्ग में प्रसिद्ध चिकित्सक एवं लेखक डॉ. बी.डी. चौरसिया के नाम पर भी व्यापक सहमति बनती दिखाई दे रही है।
पूर्व विधायक स्व. जे.पी. निगम एक प्रतिष्ठित कानूनविद होने के साथ-साथ जनहित के मुद्दों को मुखरता से उठाने वाले जनप्रतिनिधि रहे हैं। विधायक रहते हुए उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए और छतरपुर में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की मांग को लेकर गठित मेडिकल संघर्ष मोर्चा का नेतृत्व भी किया था। इसी योगदान को आधार बनाकर उनके समर्थक और मेडिकल संघर्ष मोर्चा से जुड़े कुछ सदस्य मेडिकल कॉलेज का नाम उनके नाम पर रखने की मांग कर रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग मानते हैं कि छतरपुर नगर की स्थापना करने वाले और बुंदेलखंड की आन-बान-शान के प्रतीक महाराजा छत्रसाल के नाम पर ही मेडिकल कॉलेज का नाम होना चाहिए। लोगों का कहना है कि महाराजा छत्रसाल ने मुगलों के विरुद्ध कई निर्णायक युद्ध लड़कर पूरे बुंदेलखंड की अस्मिता की रक्षा की और जिस नगर में आज पीढ़ियां निवास कर रही हैं, उसकी नींव भी उन्हीं के द्वारा रखी गई थी। ऐसे में मेडिकल कॉलेज का नाम भी उनके सम्मान में रखा जाना चाहिए।
इसी बीच जिलेभर से एक और नाम तेजी से सामने आ रहा है, जो प्रसिद्ध चिकित्सक, लेखक और मानव शरीर रचना विज्ञान (ह्यूमन एनाटॉमी) के विशेषज्ञ डॉ. बी.डी. चौरसिया का है। उन्होंने जटिल चिकित्सा विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत कर चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा दी। उनकी लिखी एनाटॉमी की पुस्तकें आज भी देश और विदेश के मेडिकल छात्रों के लिए सबसे भरोसेमंद अध्ययन सामग्री मानी जाती हैं। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग मानते हैं कि आज भी कोई मेडिकल छात्र डॉ. बी.डी. चौरसिया की पुस्तकों का अध्ययन किए बिना एक कुशल चिकित्सक बनने की कल्पना नहीं करता।
छतरपुर जिले के बारीगढ़ कस्बे में जन्मे डॉ. बी.डी. चौरसिया ने अपनी प्रतिभा और कार्यों से न केवल देश, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बुंदेलखंड और छतरपुर का नाम गौरवान्वित किया है। यही कारण है कि जिले का एक बड़ा वर्ग मेडिकल कॉलेज का नाम उनके नाम पर रखकर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देने की मांग कर रहा है।
हालांकि मेडिकल कॉलेज के नामकरण पर अंतिम निर्णय राज्य सरकार को ही लेना है, लेकिन जिले के विभिन्न वर्गों से यह मांग लगातार उठ रही है कि चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान देने वाले डॉ. बी.डी. चौरसिया के नाम पर मेडिकल कॉलेज का नामकरण कर उन्हें उचित सम्मान प्रदान किया जाए।
"छतरपुर मेडिकल कॉलेज का नाम किसके नाम पर हो? महाराजा छत्रसाल, स्व. जे.पी. निगम या डॉ. बी.डी. चौरसिया — जिलेभर में तेज हुई बहस।"

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