शिवसेना UBT में बगावत: 6 सांसद शिंदे गुट में जाने की तैयारी
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बहुत बड़ा उलटफेर होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे उद्धव ठाकरे को तगड़ा झटका लग सकता है। सूबे के कैबिनेट मंत्री और शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। उनके मुताबिक, शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद सोमवार को पाला बदलकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में शामिल होने जा रहे हैं। अगर यह दावा सच साबित होता है, तो लोकसभा में शिंदे गुट के सांसदों की संख्या सात से सीधे बढ़कर 13 हो जाएगी, जो उद्धव ठाकरे के लिए एक बड़ी राजनीतिक चोट होगी।
प्रताप सरनाईक ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि ये छह सांसद सोमवार दोपहर तीन बजे आधिकारिक तौर पर शिंदे गुट का दामन थाम लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इन सांसदों ने पहले ही लोकसभा अध्यक्ष को इस संबंध में पत्र सौंप दिया है। सरनाईक ने इस पूरे घटनाक्रम को 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम दिया और कहा कि शिवसेना को मजबूत करने का यह अभियान साल के 365 दिन चलता रहता है। उन्होंने तंज कसते हुए संजय राउत का शुक्रिया भी अदा किया और कहा कि बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को मानने वाले नेता अब शिंदे जी के साथ आ रहे हैं।
इन सांसदों के पाला बदलने की है चर्चा
जिन छह सांसदों के शिंदे गुट में जाने की सबसे ज्यादा चर्चा है, उनमें यवतमाल-वाशिम से संजय देशमुख, हिंगोली से नागेश पाटिल अष्टीकर, परभणी से संजय जाधव, शिरडी से भाऊसाहेब वाकचौरे, मुंबई उत्तर-पूर्व से संजय दिना पाटिल और धाराशिव से ओमप्रकाश राजे निंबालकर शामिल हैं। इन अटकलों को हवा तब मिली जब ये सभी सांसद हाल ही में हुई शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक से नदारद रहे थे, जिसके बाद से ही उनके पाला बदलने के कयास लगाए जा रहे थे।
नेताओं की प्रतिक्रिया और उद्धव ठाकरे का अगला कदम
इस पूरे सियासी घमासान पर दोनों तरफ से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। उद्धव गुट के विधायक महेश सावंत ने इस पर बेरुखी दिखाते हुए कहा कि 'जाने वाले चले गए', वहीं शिंदे गुट की एमएलसी डॉ. मनीषा कायंदे ने कहा कि आने वाले नेता बागी नहीं बल्कि सच्चे शिवसैनिक हैं और एकनाथ शिंदे उनका स्वागत कर रहे हैं। दूसरी ओर, इस बड़े संकट को देखते हुए उद्धव ठाकरे ने जमीन पर उतरने का फैसला किया है। वह 27 जून से महाराष्ट्र के उन सभी इलाकों का तूफानी दौरा करेंगे जहां के सांसदों के टूटने की खबर है, ताकि संगठन को बिखरने से बचाया जा सके और कार्यकर्ताओं का हौसला बरकरार रहे।

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