कुरकुरे फ्रेंच फ्राइज, गरमा-गरम पकौड़े या कड़ाही से छनकर निकले समोसे भला किसे पसंद नहीं होते? जुबान को लजीज लगने वाला यह स्वाद भले ही आपका दिन बना देता हो, लेकिन डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह आदत आपको गंभीर रूप से बीमार कर सकती है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, डीप फ्राई की गई चीजों में कैलोरी, सेचुरेटेड फैट और ट्रांस फैट की मात्रा अत्यधिक होती है, जो शरीर के भीतर जाकर स्लो पॉइजन (धीमा जहर) का काम करती है।

खास बात यह है कि बाजारों या घरों में जब एक ही तेल को बार-बार उबाला जाता है, तो उसमें कई विषैले और हानिकारक केमिकल कंपाउंड बनने लगते हैं। यह तेल शरीर के अंगों में सूजन (इंफ्लेमेशन) पैदा करता है, जिससे नसों में ब्लॉकेज और दिल की बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि महीने में एक-दो बार सीमित मात्रा में ऐसी चीजें खाना सामान्य है, लेकिन इसे रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा बनाना सेहत से खिलवाड़ करने जैसा है।

ज्यादा तला-भुना भोजन करने से शरीर को होने वाले 6 बड़े नुकसान:

1. तेजी से बढ़ता है मोटापा

भोजन को जब तेल में डीप-फ्राई किया जाता है, तो वह पानी की नमी खोकर तेल सोख लेता है, जिससे उसकी कैलोरी वैल्यू कई गुना बढ़ जाती है। यदि आप रोजाना या हर दूसरे दिन समोसे-चिप्स जैसी चीजें खाते हैं, तो शरीर में एक्स्ट्रा कैलोरी फैट के रूप में जमा होने लगती है। यह बढ़ा हुआ वजन आगे चलकर शरीर को बीमारियों का घर बना देता है।

2. दिल की बीमारियों (हार्ट अटैक) का खतरा

तले हुए खाद्य पदार्थों में पाया जाने वाला ट्रांस फैट हमारे शरीर में जाकर 'बैड कोलेस्ट्रॉल' (LDL) के स्तर को खतरनाक तरीके से बढ़ा देता है। यह गंदा फैट दिल की धमनियों (रक्त वाहिकाओं) की दीवारों पर जमने लगता है, जिससे खून का दौरा रुक जाता है। यही स्थिति आगे चलकर अचानक हार्ट अटैक या स्ट्रोक की वजह बनती है।

3. हाई ब्लड प्रेशर की समस्या

बाजार में मिलने वाले अधिकतर फ्राइड स्नैक्स को चटपटा बनाने के लिए उनमें नमक (सोडियम) का भरपूर इस्तेमाल किया जाता है। अत्यधिक सोडियम और ऑयली फूड मिलकर खून का दबाव बढ़ा देते हैं। लंबे समय तक हाई बीपी रहने से न केवल दिल, बल्कि किडनी और दिमाग की नसें भी डैमेज हो सकती हैं।

4. टाइप-2 डायबिटीज का आमंत्रण

अगर आप सोचते हैं कि सिर्फ मीठा खाने से शुगर होती है, तो आप गलत हैं। मेडिकल रिसर्च के अनुसार, अत्यधिक फैट वाली चीजें खाने से शरीर में 'इंसुलिन रेजिस्टेंस' पैदा हो जाता है। यानी शरीर का इंसुलिन हार्मोन सही ढंग से काम नहीं कर पाता, जिससे खून में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है और व्यक्ति टाइप-2 डायबिटीज का शिकार हो जाता है।

5. पाचन तंत्र का खराब होना

तैलीय और भारी भोजन को पचाने के लिए हमारे पेट और लिवर को दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है। ज्यादा ऑयल पेट के अच्छे बैक्टीरिया को नष्ट कर देता है, जिससे भोजन समय पर नहीं पचता। इसके कारण लगातार गैस, एसिडिटी, खट्टी डकारें, अपच और पेट फूलने (ब्लोटिंग) जैसी पेट की बीमारियां बनी रहती हैं।

6. कोलेस्ट्रॉल का असंतुलन

तले हुए खाद्य पदार्थ हमारे शरीर के मित्र यानी 'गुड कोलेस्ट्रॉल' (HDL) को घटाते हैं और दुश्मन यानी 'बैड कोलेस्ट्रॉल' को बढ़ाते हैं। जब शरीर में यह असंतुलन पैदा होता है, तो पूरी मेटाबोलिक सेहत बिगड़ जाती है।

विशेषज्ञों की सलाह: अगर आप लंबी और सेहतमंद जिंदगी जीना चाहते हैं, तो रिफाइंड तेल और डालडा में तली चीजों से दूरी बनाएं। इसके विकल्प के रूप में घर का बना ताजा खाना खाएं और खाना पकाने के लिए बेकिंग, ग्रिलिंग, स्टीमिंग या 'एयर फ्रायर' जैसे कम तेल वाले आधुनिक तरीकों को अपनाएं।