जबलपुर: आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित कल देने के लिए पर्यावरण को सहेजना बेहद जरूरी है, जिसके लिए देशभर में लगातार पौधारोपण अभियान चलाए जाते हैं। हालांकि, कई बार यह मुहिम सिर्फ पौधे रोपने तक ही सीमित रह जाती है और देखरेख की कमी से वे जल्द ही दम तोड़ देते हैं। ऐसे ही दम तोड़ते और सूखते पौधों को नया जीवन देने का बीड़ा जबलपुर के रहने वाले मोहन सिंह ठाकुर ने उठाया है। वे अपनी एक अनूठी 'ग्रीन एम्बुलेंस' के जरिए उन पौधों की सेवा और सुध लेने निकल पड़ते हैं, जिन्हें लोग लगाकर भूल चुके हैं।

नौकरी से सेवानिवृत्ति के बाद चुना समाज सेवा का अनूठा रास्ता

करीब 65 वर्ष के हो चुके मोहन सिंह ठाकुर चाहते तो रिटायरमेंट के बाद आराम की जिंदगी बसर कर सकते थे, लेकिन उन्होंने प्रकृति को सहेजने का संकल्प लिया। इसके लिए उन्होंने अपनी पुरानी कार में ही जरूरी बदलाव करके उसे एक 'ग्रीन एम्बुलेंस' का रूप दे दिया। रोज सुबह होते ही मोहन सिंह अपनी इस विशेष गाड़ी को लेकर नगर के विभिन्न रास्तों और पार्कों की ओर निकल पड़ते हैं, ताकि बेजुबान पौधों की प्यास बुझाई जा सके।

चलता-फिरता बगीचा है यह 'ग्रीन एम्बुलेंस'

मोहन सिंह की यह एम्बुलेंस आधुनिक सुविधाओं और संसाधनों से लैस है। उन्होंने अपनी कार के भीतर लगभग 180 लीटर की क्षमता वाली पानी की एक बड़ी टंकी स्थापित करवाई है। वे जहाँ भी जाते हैं, वहां लगे पौधों की सिंचाई करते हैं, उनमें पोषक खाद डालते हैं और कमजोर पौधों को बचाने के लिए बांस और बल्लियों का सहारा देते हैं। इसके साथ ही गाड़ी में जैविक खाद बनाने के उपकरण और नए पौधे भी हमेशा मौजूद रहते हैं।

  • पेड़ बनने तक का सफर: संजीवनी नगर के रहने वाले और पावर ग्रिड से बतौर सीनियर जनरल मैनेजर रिटायर हुए मोहन सिंह ठाकुर गुलौआ ताल, संजीवनी नगर, शैलपर्ण उद्यान और देवताल जैसी जगहों पर लगातार सक्रिय हैं। वे केवल पौधा लगाते नहीं हैं, बल्कि जब तक वह एक मजबूत पेड़ नहीं बन जाता, उसकी पूरी जिम्मेदारी उठाते हैं।

  • लापरवाही पर जताई चिंता: मोहन सिंह का कहना है कि लोग बड़े चाव से पौधे तो लगा देते हैं, पर उनकी परवरिश करना भूल जाते हैं। उचित पानी न मिलने से लाखों पौधे असमय ही सूख जाते हैं। यदि सही वक्त पर इन्हें पानी और खाद मिले, तो ये आने वाले समय में विशालकाय वृक्ष बन सकते हैं।

कम पानी में सिंचाई के लिए 'ड्रिप तकनीक' का देसी जुगाड़

पानी की बचत और पौधों की लगातार सिंचाई के लिए मोहन सिंह ने एक बेहद होशियार तरीका निकाला है। वे पौधे की जड़ के पास 4 से 5 लीटर की प्लास्टिक की बोतल को करीब आठ इंच जमीन के अंदर गाड़ देते हैं। इस बोतल के निचले हिस्से में एक बारीक छेद करके उसमें सूती कपड़ा या धागा पिरो दिया जाता है। इस देसी जुगाड़ से पानी बूंद-बूंद करके सीधे पौधे की जड़ों तक पहुंचता रहता है, जिससे भीषण गर्मी में भी पौधों को लगातार नमी मिलती रहती है।

युवाओं को मिल रही नई दिशा

बुजुर्ग मोहन सिंह ठाकुर के इस जज्बे और अनुकरणीय कार्य को देखकर अब स्थानीय लोग और खास तौर पर युवा वर्ग उनसे काफी प्रभावित हो रहा है। कई युवा अब छुट्टी के दिनों में उनकी इस मुहिम का हिस्सा बन रहे हैं और पौधों की देखभाल में अपना हाथ बंटा रहे हैं, ताकि आने वाले समय में शहर को एक स्वच्छ, सुंदर और हरा-भरा वातावरण मिल सके।