बिलासपुर और जगदलपुर में कांग्रेस का दबदबा, सूरजपुर में भाजपा की जीत
रायपुर: छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानीय निकायों में हुए उपचुनावों के अंतिम परिणाम घोषित कर दिए गए हैं, जिसमें सूबे की दोनों प्रमुख पार्टियों—कांग्रेस और भाजपा—के बीच अलग-अलग क्षेत्रों में कांटे की टक्कर देखने को मिली है। एक तरफ जहाँ बिलासपुर और जगदलपुर नगर निगम के वार्डों में हुए उपचुनावों में कांग्रेस ने अपना दबदबा बरकरार रखा, वहीं दूसरी तरफ सूरजपुर नगर पंचायत में अध्यक्ष की कुर्सी पर भाजपा ने कब्जा जमा लिया है। राजनांदगांव जिले के घुमका नगर पंचायत में भी अध्यक्ष पद पर कांग्रेस ने फतह हासिल कर अपनी ताकत दिखाई है, हालांकि वार्ड पार्षदों की संख्या के मामले में भाजपा का पलड़ा भारी रहा, जिसने इस पूरे चुनावी मुकाबले को बेहद रोचक बना दिया।
जगदलपुर नगर निगम: कांग्रेस ने फिर बचाया अपना गढ़
बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर नगर निगम के अंतर्गत आने वाले इंदिरा वार्ड के उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार ने एकतरफा मुकाबले में भाजपा प्रत्याशी को 436 मतों के अंतर से शिकस्त दी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह वार्ड पारंपरिक रूप से कांग्रेस का मजबूत किला रहा है, जिसे भेदने में भाजपा इस बार भी नाकाम साबित हुई।
बिलासपुर नगर निगम: एक हजार से अधिक वोटों से जीती कांग्रेस
न्यायधानी बिलासपुर नगर निगम के वार्ड नंबर 29 (संजय गांधी नगर) में भी चुनावी नतीजे कांग्रेस के पक्ष में रहे। यहाँ कांग्रेस प्रत्याशी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भाजपा के प्रतिद्वंद्वी को 1062 वोटों के भारी अंतर से करारी शिकस्त दी। बड़े अंतर से मिली इस जीत ने यह साबित कर दिया कि इस शहरी क्षेत्र में कांग्रेस की पकड़ आज भी बेहद मजबूत है।
घुमका नगर पंचायत: पार्षदों में भाजपा आगे, पर अध्यक्ष की कुर्सी कांग्रेस को
संस्कारधानी राजनांदगांव जिले की नवगठित घुमका नगर पंचायत के नतीजों ने सबको चौंका दिया। यहाँ वार्ड स्तर पर भाजपा ने एकतरफा बढ़त बनाते हुए 10 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को केवल 3 और निर्दलीय को 1 सीट मिली। लेकिन जब बात अध्यक्ष पद के मुख्य मुकाबले की आई, तो वहां कांग्रेस प्रत्याशी बाजी मारने में सफल रहा।
सूरजपुर नगर पंचायत: विपरीत परिस्थितियों में खिला 'कमल'
सरगुजा संभाग के सूरजपुर नगर पंचायत में कहानी घुमका से बिल्कुल उलट रही। यहाँ के कुल वार्डों में कांग्रेस ने मामूली बढ़त हासिल करते हुए 8 सीटों पर कब्जा जमाया और भाजपा को 7 सीटें मिलीं। इसके बावजूद, जब मुख्य अध्यक्ष पद की मतगणना हुई तो भाजपा के उम्मीदवार ने कांग्रेस प्रत्याशी को 362 वोटों से पीछे धकेलते हुए अध्यक्ष की कुर्सी पर अपना अधिकार सुरक्षित कर लिया।
निकाय चुनाव के नतीजों का राजनीतिक संदेश
इन उपचुनावों के ओवरऑल नतीजों से यह स्पष्ट संदेश मिलता है कि छत्तीसगढ़ की जमीनी राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मुकाबला बेहद कड़ा है। कांग्रेस ने जहाँ बड़े नगर निगमों और शहरी मतदाताओं के बीच अपना वर्चस्व सिद्ध किया है, वहीं भाजपा ने नगर पंचायतों और ग्रामीण अंचलों से जुड़े वार्डों में निर्णायक बढ़त हासिल कर अपनी जमीनी पकड़ का अहसास कराया है।

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