बार-बार नींद आना हो सकता है बीमारी का संकेत, जानिए बचाव के तरीके
अगर आप भी सुबह सोकर उठने के बाद या दिनभर दफ्तर और घर के कामों के दौरान लगातार कमजोरी, थकावट या नींद आने से परेशान रहते हैं, तो इसे केवल काम की व्यस्तता या बदलते मौसम का असर मानकर टालने की भूल बिल्कुल न करें। लंबे समय तक शरीर में ऊर्जा की कमी बने रहना और हर वक्त झपकियां आना, असल में आपके शरीर के भीतर पनप रही किसी छिपी हुई बीमारी या गड़बड़ी का बड़ा इशारा हो सकता है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, रात में 7 से 8 घंटे की भरपूर और सुकून भरी नींद लेने के बाद भी यदि आपको आलस घेरे रहता है, किसी भी काम में ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत आती है या शरीर पूरी तरह बेजान महसूस होता है, तो इसके पीछे आपकी असंतुलित दिनचर्या, खान-पान में पोषक तत्वों की भारी कमी, मानसिक तनाव या कुछ क्रॉनिक बीमारियां जिम्मेदार हो सकती हैं। हमारा शरीर किसी भी बड़ी समस्या से पहले लगातार छोटे-छोटे संकेत देता है, जिन्हें समय रहते पहचानना और अपनी आदतों में सुधार करना सेहत के लिए बेहद आवश्यक है। आइए जानते हैं कि हर वक्त शरीर के सुस्त रहने की मुख्य वजहें क्या हैं और इससे कैसे निपटा जाए।
हर समय थकावट और नींद आने के मुख्य कारण:
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1. अधूरी और खराब नींद: एक वयस्क इंसान के लिए रोजाना कम से कम 7 से 9 घंटे की गहरी नींद लेना बेहद जरूरी है। यदि आप देर रात तक जागते हैं या आपकी नींद बार-बार टूटती है, तो शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता, जिससे अगले दिन सुस्ती बनी रहती है।
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2. न्यूट्रिएंट्स की कमी: शरीर में आयरन, विटामिन B12, विटामिन D और फोलेट जैसे बेहद जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स की कमी होने से हीमोग्लोबिन और एनर्जी लेवल गिर जाता है। इसके चलते मांसपेशियों में कमजोरी, सिर घूमने और लगातार आलस आने की समस्या पैदा होती है।
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3. मानसिक तनाव और डिप्रेशन: अत्यधिक मानसिक दबाव, दफ्तर की चिंता या मानसिक रूप से परेशान रहने का सीधा असर हमारे नर्वस सिस्टम और नींद की क्वालिटी पर पड़ता है। मानसिक थकावट शरीर को बहुत जल्दी थका देती है।
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4. डिहाइड्रेशन (पानी की कमी): बहुत से लोग दिनभर में पर्याप्त पानी नहीं पीते। शरीर में पानी की कमी होते ही मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है, जिससे चक्कर आना, सिरदर्द होना और ऊर्जा का स्तर अचानक गिर जाना आम बात है।
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5. सुस्त लाइफस्टाइल (फिजिकल एक्टिविटी न करना): घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना या शारीरिक श्रम न करने से शरीर का ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है। व्यायाम न करने वाले लोग एक्टिव रहने वालों की तुलना में ज्यादा आलसी महसूस करते हैं।
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6. अंदरूनी बीमारियां: यदि लाइफस्टाइल अच्छी होने के बाद भी थकान नहीं जा रही, तो यह थायराइड (हाइपोथायरायडिज्म), एनीमिया (खून की कमी), डायबिटीज या स्लीप एपनिया (नींद में सांस रुकना) जैसी गंभीर बीमारियों का शुरुआती लक्षण हो सकता है।
इस समस्या से उबरने के आसान और कारगर उपाय:
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स्लीप शेड्यूल सुधारें: सोने और जागने का एक पक्का समय निर्धारित करें। रात को सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी जैसी स्क्रीन से दूरी बना लें ताकि गहरी नींद आ सके।
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पोषक तत्वों से भरपूर डाइट: अपने दैनिक भोजन में मौसमी फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, अंकुरित अनाज, दालें, ड्राई फ्रूट्स और प्रोटीन से भरपूर चीजों को शामिल करें। जंक फूड और अत्यधिक मीठी चीजों से तौबा करें।
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खुद को रखें हाइड्रेटेड: सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक नियम से पानी पिएं। दिनभर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी या नारियल पानी, नींबू पानी और छाछ जैसे तरल पदार्थों का सेवन जरूर करें।
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शारीरिक रूप से सक्रिय रहें: आलस को दूर भगाने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप रोजाना कम से कम 30 मिनट के लिए योग, प्राणायाम, हल्की कसरत या तेज कदमों से टहलने (वॉक) की आदत डालें।
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मानसिक शांति है जरूरी: तनाव को खुद पर हावी न होने दें। इसके लिए रोजाना सुबह कुछ देर ध्यान (मेडिटेशन) लगाएं, गहरी सांस लेने वाले प्राणायाम करें और अपने शौक या परिवार के साथ वक्त बिताएं।

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