TMC के निष्कासित विधायकों पर कुणाल घोष का तंज, बोले- शिकायत थी तो नेतृत्व से बात करते
कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ प्रवक्ता कुणाल घोष ने सोमवार को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित किए गए दो विधायकों पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि कथित फर्जी हस्ताक्षर विवाद को लेकर इन विधायकों को सीधे विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के पास जाने के बजाय पहले अपनी ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क साधना चाहिए था और अपनी बात रखनी चाहिए थी।
क्या है पूरा विवाद?
तृणमूल कांग्रेस ने हाल ही में अपने दो विधायकों, संदीपान साहा और ऋतब्रत बनर्जी को दल से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इन दोनों पर लगातार पार्टी की बैठकों से नदारद रहने और संगठन के खिलाफ काम करने के गंभीर आरोप लगे हैं। यह सख्त कदम मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की एक हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस के तत्काल बाद उठाया गया है। मुख्यमंत्री ने खुलासा किया था कि इन दोनों विधायकों ने ही विधानसभा में शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष चुने जाने के दौरान हुए फर्जी दस्तखत के मामले में स्पीकर से औपचारिक शिकायत की थी।
कुणाल घोष ने पार्टी के फैसले को ठहराया जायज
प्रेस वार्ता के दौरान कुणाल घोष ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा:
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मुख्यमंत्री द्वारा शिकायत करने वाले विधायकों के नाम उजागर करने से टीएमसी का उन्हें निष्कासित करने का फैसला पूरी तरह सही साबित हो गया है।
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यदि किसी विधायक को हस्ताक्षर की प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी या आपत्ति नजर आ रही थी, तो उसे सबसे पहले अपने दल के मुखिया को इस बारे में सचेत करना चाहिए था।
उन्होंने यह भी साफ किया कि जिस समय विधायकों के दस्तखत लिए जा रहे थे, उस दौरान ममता बनर्जी वहां पर मौजूद नहीं थीं। घोष ने कड़े शब्दों में याद दिलाया कि आज जितने भी विधायक सदन में बैठे हैं, वे सभी टीएमसी के सिंबल और ममता बनर्जी के जनसमर्थन की बदौलत ही चुनाव जीते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि अगर पार्टी इतनी ही खराब थी, तो इन नेताओं ने टीएमसी के टिकट पर चुनाव क्यों लड़ा और ममता बनर्जी के चेहरे पर जनता से वोट क्यों मांगे? उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं को सिर्फ सत्ता की मलाई खानी होती है, इसलिए वे अपनी वफादारी बदलते रहते हैं। जनता ने उन्हें ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए वोट दिया था, लिहाजा वे जनता के भरोसे के साथ धोखा नहीं कर सकते।
खुद के हस्ताक्षर पर दी सफाई
शोभनदेब चट्टोपाध्याय के समर्थन पत्र में अपने खुद के दस्तखत को लेकर उठ रहे सवालों पर भी घोष ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनके हस्ताक्षरों में किसी भी तरह की कोई हेराफेरी नहीं है। उन्होंने फॉर्म के भीतर तय स्थान पर अपना नाम बड़े अक्षरों (कैपिटल लेटर्स) में लिखा था और जहां आवश्यक था, वहां अपने आधिकारिक हस्ताक्षर किए थे। घोष ने बताया कि उन्होंने यही लिखित स्पष्टीकरण सीआईडी (CID) के समक्ष भी दर्ज करा दिया है।
आखिरी में उन्होंने दल के अन्य सभी विधायकों से अपील की कि वे विपक्षी दलों के किसी भी तरह के प्रलोभन या लालच में न आएं। यदि संगठन के भीतर कोई भी समस्या है, तो उसे अनुशासन के साथ पार्टी फोरम में उठाएं, न कि ऐसी हरकतों में शामिल हों जिससे पार्टी की साख को नुकसान पहुंचे। इस बड़े सियासी घटनाक्रम के बाद कोलकाता से लेकर दिल्ली तक की राजनीति गरमा गई है।

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