भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने वाले एक बड़े प्रोजेक्ट को लेकर अहम रास्ता साफ हो गया है। अयोध्या बाईपास को वर्तमान 4-लेन से बढ़ाकर भव्य 10-लेन मार्ग में तब्दील करने की महायोजना को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने अपनी मंजूरी दे दी है। रत्नागिरी तिराहे से लेकर आसाराम चौराहे तक के करीब 16.4 किलोमीटर लंबे इस हिस्से के चौड़ीकरण से न सिर्फ वाहन चालकों को रोजाना के भारी जाम से मुक्ति मिलेगी, बल्कि राजा भोज एयरपोर्ट तक का सफर भी बेहद सुगम और कम समय में पूरा होने लगेगा।

कड़े प्रतिबंधों के साथ मिली मंजूरी: लापरवाही पर ठेकेदार का पेमेंट रुकेगा

सड़क के इस मेगा विस्तार के लिए बड़ी संख्या में हरे-भरे पेड़ों को हटाया जाना प्रस्तावित है, जिसके विरोध में पर्यावरणविदों ने एनजीटी (NGT) का दरवाजा खटखटाया था। इस मामले पर गंभीरता से सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने के लिए बेहद कड़े नियम और शर्तें लागू की हैं। एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि यदि नए पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने में किसी भी स्तर पर सुस्ती या लापरवाही पाई गई, तो निर्माण कार्य में जुटे ठेकेदार (कॉन्ट्रैक्टर) के भुगतान (पेमेंट) पर तुरंत रोक लगा दी जाएगी।

कम की गई डिवाइडर की चौड़ाई; अब कटेंगे 7,871 पेड़

पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे, इसके लिए योजना के नक्शे में अहम बदलाव किए गए हैं। शुरुआती ब्लूप्रिंट के अनुसार पहले 9 हजार से अधिक पेड़ों को काटने की तैयारी थी, लेकिन तकनीकी समीक्षा के बाद बीच के डिवाइडर (सड़क विभाजक) की चौड़ाई को घटा दिया गया। इस सूझबूझ से करीब 1,100 से अधिक पेड़ों को जीवनदान मिल गया है, और अब कटने वाले पेड़ों की कुल संख्या घटकर 7,871 रह गई है। हालांकि, पर्यावरण की भरपाई के लिए ट्रिब्यूनल ने इसके बदले में रिकॉर्ड 80,000 नए पेड़ लगाने का सख्त आदेश जारी किया है।

ड्रोन और सैटेलाइट से 15 साल तक होगी पौधों की निगरानी; पाम ट्री बैन

इस 10-लेन प्रोजेक्ट के तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और निर्माण कंपनी के बीच हुए आधिकारिक अनुबंध में पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई कड़े बिंदु शामिल किए गए हैं:

  • जीवित रखने की गारंटी: रोपे गए नए पौधों को जिंदा रखने और उनकी परवरिश की पूरी जवाबदेही निर्माण एजेंसी (ठेकेदार) की तय की गई है।

  • पहले साल का टारगेट: पौधारोपण के पहले वर्ष के भीतर कम से कम 90 प्रतिशत पौधों का जीवित और स्वस्थ रहना अनिवार्य होगा।

  • जियो टैगिंग और ड्रोन से ऑडिट: लगाए जाने वाले प्रत्येक पौधे की डिजिटल मैपिंग (जियो टैगिंग) की जाएगी। आगामी 15 वर्षों तक इन पौधों की सेहत और विकास पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों, लगातार वीडियोग्राफी और सैटेलाइट इमेजरी (उपग्रह चित्रों) की मदद से हाईटेक ऑडिट किया जाएगा।

  • इन विभागों को मिली कमान: पौधों की सुरक्षा और निगरानी का संयुक्त जिम्मा वन विभाग, नगर पालिक निगम, उद्यानिकी विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को संयुक्त रूप से सौंपा गया है।

  • पेड़ों का आकार और प्रकार: एनजीटी ने गाइडलाइन जारी की है कि लगाए जाने वाले पौधों की शुरुआती ऊंचाई 6 फीट से कम नहीं होनी चाहिए, ताकि वे जल्द वृक्ष का रूप ले सकें। इसके साथ ही, सिर्फ दिखावे के लिए लगाए जाने वाले पाम ट्री (ताड़ के सजावटी पेड़) लगाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है, इसकी जगह छायादार और स्थानीय प्रजातियों के पौधे ही रोपे जाएंगे।