नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के मंच पर भारत ने एक बार फिर पड़ोसी देश पाकिस्तान को उसकी हरकतों के लिए कड़ी फटकार लगाई है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने एक महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान पाकिस्तान द्वारा जबरन जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने पर बेहद तीखा और करारा जवाब दिया। भारत ने बेहद साफ और दोटूक शब्दों में कहा कि जिस देश का खुद का इतिहास नरसंहार, हिंसा और क्रूरता के काले कारनामों से रंगा हुआ है, उस देश का भारत के आंतरिक मामलों पर उंगली उठाना या कोई टिप्पणी करना अपने आप में एक बेहद भद्दा मजाक है।

अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हवाई हमले और मासूमों के कत्लेआम का खुलासा

भारतीय प्रतिनिधि ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के हालिया क्रूर कृत्यों का पूरा कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया। उन्होंने अफगानिस्तान की धरती पर पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमलों का मुद्दा बेहद आक्रामक तरीके से उठाया। दुनिया को याद दिलाते हुए भारतीय राजदूत ने कहा कि इसी साल मार्च के पवित्र रमजान महीने में, पाकिस्तानी सेना ने काबुल में स्थित ओमिद नशामुक्ति उपचार अस्पताल पर बेहद बर्बरता से हवाई हमला किया था। संयुक्त राष्ट्र मिशन के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए भारत ने बताया कि इस खौफनाक हमले में 269 बेगुनाह नागरिकों की मौत हो गई थी और 122 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। यह हमला कायरता की हद पार करते हुए उस समय किया गया था जब लोग नमाज खत्म करके मस्जिद से बाहर आ रहे थे। भारत ने बेबाकी से कहा कि पाकिस्तान रात के अंधेरे का फायदा उठाकर मासूमों पर बम बरसाता है और फिर दुनिया के सामने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पाखंड रचता है।

अपने ही नागरिकों पर अत्याचार और 1971 के काले इतिहास की याद

पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए भारतीय राजदूत ने उसके द्वारा अपने ही नागरिकों पर ढाए गए ऐतिहासिक जुल्मों को भी दुनिया के सामने उजागर किया। उन्होंने साल 1971 की बर्बरता का जिक्र करते हुए कहा कि यह वही पाकिस्तान है जिसने 'ऑपरेशन सर्चलाइट' के नाम पर अपनी ही बेकसूर जनता पर अमानवीय और रूह कंपा देने वाले अत्याचार किए थे। भारत ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो देश अपने ही लोगों का कत्लेआम करता आया हो, उसके मुंह से मानवाधिकारों की बड़ी-बड़ी बातें बिल्कुल शोभा नहीं देतीं। पाकिस्तानी हमलों के कारण अब तक 94,000 से ज्यादा अफगान नागरिकों को अपना घर-बार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा है।

आंतरिक नाकामियों को छिपाने के लिए प्रोपेगैंडा और आतंकवाद का सहारा

भारत ने वैश्विक समुदाय के सामने यह बात पूरी तरह साफ कर दी कि पाकिस्तान पिछले कई दशकों से अपनी घरेलू और आंतरिक नाकामियों से अपनी जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए वह अपनी सीमाओं के अंदर और बाहर लगातार आतंकवाद तथा हिंसा को बढ़ावा देता आया है। भारतीय प्रतिनिधि ने अपने संबोधन के अंत में बेहद दृढ़ता और मजबूती से कहा कि जिस देश के पास न तो कोई अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता बची है, न ही कानून की कोई गरिमा है और न ही कोई नैतिक मूल्य हैं, उसकी इस खोखली बयानबाजी, झूठे दावों और प्रोपेगैंडा को अब पूरी दुनिया बहुत अच्छी तरह से समझ चुकी है।