निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस की तैयारी: साल भर पहले संभावित उम्मीदवारों की खोज
2022 के चुनाव में कई निकायों में प्रत्याशी नहीं मिले थे
भोपाल। मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय के चुनाव वर्ष 2027 में होने हैं। पिछले चुनावों के अनुभव से सबक लेते हुए प्रदेश कांग्रेस सालभर पहले यानी अभी से संभावित प्रत्याशी की तलाश करेगी। आरक्षण की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रत्याशी तलाशे जाएंगे। इस काम में मोहल्ला, पंचायत और वार्ड समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। इनके द्वारा जो नाम प्रस्तावित किए जाएंगे, उन्हें गुण-दोष के आधार पर ब्लाक और जिला कांग्रेस परखेगी। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस द्वारा अंतिम रूप दिया जाएगा। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि वर्ष 2022 के चुनाव में कई निकायों के लिए पार्टी को प्रत्याशी ही नहीं मिले थे और भाजपा के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए थे। यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इससे 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए जनता का मूड पता चल जाएगा।
वर्ष 2022 में हुए नगरीय निकाय चुनाव में पहली बार कांग्रेस के पांच महापौर (मुरैना, ग्वालियर, छिंदवाड़ा, जबलपुर और रीवा) चुने गए थे। ग्वालियर, चंबल और छिंदवाड़ा क्षेत्र में कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में बढ़त भी मिली थी। चूंकि, नगरीय निकायों के चुनाव से प्रदेश में एक प्रकार से चुनावों की शुरुआत हो जाएगी, इसलिए पार्टी इन्हें गंभीरता से ले रही है। संगठन सृजन अभियान के तीसरे चरण में मंडल, पंचायत, वार्ड और फिर मोहल्ला समितियां का गठन किया जा रहा है। यह पार्टी की बूथ पर मोर्चा संभालने वाली इकाइयां होंगी। इसके साथ-साथ पार्टी ने अभी से नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव की तैयारी भी प्रारंभ करने की कार्ययोजना बनाई है। नगरीय निकाय चुनाव दलीय आधार पर होते हैं इसलिए प्रत्याशी चयन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। तय किया गया है कि मोहल्ला स्तर तक समितियां गठित होने के बाद इस दिशा में काम प्रारंभ कर दिया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है कि हमने दो साल में बूथ स्तर तक संगठन के सशक्तीकरण का काम किया है। निकाय चुनाव के लिए प्रत्याशी पहले ही तय कर लेंगे।
निकाय चुनाव के लिए भी प्रभारी होंगे नियुक्त
सूत्रों का कहना है कि एक साल पूर्व प्रत्याशियों को तलाशने के अलावा प्रत्याशियों का भी पैनल रहेगा ताकि कोई टूट-फूट होती है तो भी विकल्प मौजूद रहे। दरअसल, पिछले चुनाव में नाम वापसी के बाद कुछ प्रत्याशी मैदान से हट गए थे जिसके कारण कांग्रेस के पास निर्दलीयों को समर्थन देने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं रह गया था। इसका परिणाम यह हुआ कि पार्टी के अन्य प्रत्याशी भी माहौल खराब होने के कारण हार गए थे। पार्टी पदाधिकारी का कहना है कि नगरीय निकाय चुनाव के लिए अलग से प्रभारी नियुक्त किए जाएंगे। इनका काम केवल नगरीय निकाय चुनाव पर फोकस करने का रहेगा। स्थानीय विधायक, पूर्व विधायक और प्रदेश पदाधिकारी को एक एक निकाय की जिम्मेदारी से की जाएगी। कांग्रेस के जगत प्रताप सिंह जबलपुर और मुरैना से शारदा सोलंकी महापौर चुने गए थे। दोनों भाजपा में शामिल हो गए। छिंदवाड़ा के महापौर विक्रम अहाके ने भी मुख्यमंत्री डा। मोहन यादव और तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा की उपस्थिति में भाजपा की सदस्यता ले ली थी लेकिन 18 दिन में ही वापस कांग्रेस में लौट गए।

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