15 फरवरी को महाशिवरात्रि, बाबा महाकाल मंदिर में 6 फरवरी से 9 दिवसीय उत्सव होगा शुरू, जानें किस दिन कौन सा कार्यक्रम
महाशिवरात्रि का पर्व हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. इस बार यह शुभ तिथि 15 फरवरी दिन रविवार को है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था. इस शुभ अवसर पर उज्जैन के महाकाल मंदिर में 9 दिवसीय उत्सव होता है और इस बार यह उत्सव 6 फरवरी से शुरू होगा.
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है और इस बार यह शुभ तिथि 15 फरवरी दिन रविवार को है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था. इस दिन भक्त व्रत रखकर विधि विधान के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करते हैं. महाशिवरात्रि के मौके पर सभी शिव मंदिरों को सजाया जाता है और कई धार्मिक कार्यक्रम किए जाते हैं. अब चूंकि महाशिवरात्रि में कुछ ही दिन का समय बचा है और शिव-पार्वती के विवाह के इस त्योहार को लेकर उज्जैन के बाबा महाकाल मंदिर में तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं.
महाकाल मंदिर की दीवारों से लेकर शिखर पर रंग-रोगन किया जा रहा है. इसी के साथ 6 फरवरी से मंदिर में 9 दिनों तक चलने वाले उत्सव की शुरुआत होगी, जिसमें बाबा भक्तों को नौ अलग-अलग रूपों में दर्शन देंगे. महाशिवरात्रि के लिए मंदिर में की जा रही तैयारियों पर महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि इस बार महाशिवरात्रि का त्योहार 15 फरवरी को मनाया जाएगा. कुछ जगह तिथि को लेकर थोड़ा भ्रम है, लेकिन 15 फरवरी को ही शिवरात्रि उज्जैन में मनाई जाएगी.
बाबा महाकाल की नगरी में महाशिवरात्रि का सेलिब्रेशन 9 दिन तक चलता है, जो 6 फरवरी से शुरू होगा और 15 फरवरी तक चलेगा, जिसमें रोजाना भगवान का रुद्राभिषेक, 24 घंटे निराकार रूप में दर्शन और जलधारी, रात के समय स्नान और वस्त्र धारण का कार्यक्रम रहेगा. साथ ही अलग-अलग नौ विग्रहों की स्थापना और पूजा की जाएगी. ये नौ दिन भगवान की पूजा नवरात्रि के नौ दिनों जैसी होती है. भक्तों के लिए मंदिर भी खुले रहेंगे और भक्त बाबा महाकाल पर जलधारी अर्पित कर पाएंगे.
पुजारी ने बताया कि पहले दिन बाबा का दुशाला ओढ़ाकर शृंगार होता है और फिर दूसरे दिन बाबा को शेषनाग धारण कराए जाते हैं. तीसरे दिन घटाघटा स्थापित किया जाता है, जो शिवलिंग के समान ही होता है. चौथे दिन प्रभु के छवि दर्शन होते हैं और पांचवें दिन बाबा को मन-महेश, उमा महेश, शिव तांडव और होलकर के रूप में सजाया जाता है.
15 फरवरी को होने वाली खास पूजा और अनुष्ठान पर पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि 15 फरवरी को जलधारी के साथ चारों पहर की पूजा और आरती होगी और रात के समय स्नान के साथ बाबा को दूल्हे के रूप में शृंगार कर सजाया जाएगा और रात को विशेष शृंगार पूजा होगी, जिसे सेहरा दर्शन भी कहा जाता है.
इस दौरान नौ दिनों तक मंदिर परिसर में भजन और कीर्तन का आयोजन होगा और भक्तों के आगमन के लिए तैयारियां की जा रही हैं क्योंकि महाशिवरात्रि के दिन मंदिर में भीड़ बढ़ जाती है. मंदिर में हो रही तैयारी पर उन्होंने कहा कि गर्भगृह की सफाई, मंदिर के कुंड़ों की सफाई और रंग-रोगन का काम शुरू हो चुका है, जिसे 6 फरवरी तक खत्म करने की कोशिश रहेगी.

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