इस मंदिर में तीन सीढ़ी चढ़ते ही आने लगती है हल्दी उबटन की महक, जान तक पता नहीं चल पाई वजह!
भीलवाड़ा जिले के करेड़ा में एक चमत्कारी मंदिर अपनी महक के कारण हमेशा श्रद्धालुओं के बीच चर्चा में बना रहता है. गुर्जर समुदाय के आराध्य भगवान श्री देवनारायण के पिता भोजा जी का मंदिर भीलवाड़ा जिले के करेड़ा क्षेत्र में स्थित है. हर साल इस मंदिर में बड़ी संख्या में देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं.
इस मंदिर के गर्भगृह में स्थित मूर्ति के नजदीक जैसे ही भक्त पहुंचते हैं, तो उन्हें विवाह समारोह में इस्तेमाल किए जाने वाली हल्दी के उबटन की खुशबू आने लगती है. जबकि मूर्ति से दूर-दूर तक हल्दी और उससे जुड़ी किसी वस्तु की मौजूदगी नहीं होती है. यहां देवनारायण के पिता भोजा जी जिनको सवाई भोज भी कहते हैं, उनकी मूर्ति स्थापित है. मंदिर की तीन सीढ़ियों से ही हल्दी-पीटी की खुशबू आती है. इसे भक्त महत्वपूर्ण चमत्कार मानते हैं.
मंदिर के तीसरे सीढ़ी से आने लगती है खुशबू
देवनारायण जन्म स्थली मालासेरी और अंतरराष्ट्रीय तीर्थ स्थल सवाई भोज के साथ ही भीलवाड़ा जिले के करेड़ा क्षेत्र में स्थित भोजा पायरा का मंदिर भी विश्व प्रसिद्ध है, जहां गुर्जर समाज के साथ ही सर्व समाज के लोग भगवान भोजा जी के दर्शन कर परिवार में सुख, शांति व समृद्धि की कामना करते हैं. भोजा पायरा मंदिर के अध्यक्ष सुखलाल गुर्जर ने कहा कि भोजपरा का स्थान प्रसिद्ध है. यहां बगड़ावतों का ऐतिहासिक इतिहास है.
आज से लगभग 1300 वर्ष पूर्व देवनारायण के पिता भोजा जी ने यह स्थान बनाया था. आज भी वही स्थित है और कोई छेड़छाड़ नहीं हुआ है, न कोई छेड़छाड़ कर सकता है. यह बगड़ावतों के समय का भोजा पायरा के नाम से विख्यात स्थान है. यहां देवनारायण के पिता भोजा जी, जिनको सवाई भोज भी कहते हैं, उनकी मूर्ति स्थापित है. मंदिर की तीन सीढ़ियों से ही हल्दी-पीटी की खुशबू आती है. इसे समाज के लोग महत्वपूर्ण चमत्कार मानते हैं.
यह है मंदिर का इतिहास
भोजा पायरा मंदिर के अध्यक्ष सुखलाल गुर्जर ने कहा कि भोजा जी मंदिर के इतिहास की अगर बात करें, तो गोटा नगरी से देवनारायण भगवान के पिता भोजा जी गाय चराने आते थे. इसी स्थल पर रानी जेमती ने भगवान श्री देवनारायण के पिता सवाई भोज (भोजा जी) को विराट मां जगदम्बा के रूप में दर्शन दिया था. इस दौरान रानी जेमती ने सवाई भोज को वरदान दिया था कि उनका नाम अब हमेशा के लिए सवाया रहेगा. वो सवाई भोज के नाम से विश्व में पूजे जाएंगे.
रानी जेमती जब यहां आई थी, तब भगवान देवनारायण के पिता सवाई भोज (भोजा जी) दूल्हे के रूप में थे और उनके शरीर पर पीटी लगी हुई थी. सवाई भोज (भोजा जी) युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो गए थे, तभी से यहां पीटी की खुशबू आती है. उन्होंने बताया कि मंदिर के ऊपर छत भी नहीं है. कई बार बनाने की कोशिश की, लेकिन बना नहीं पाए. इस जंगल में पास ही स्थित रूपनाथ जी की धुणी है, वहां पर लोगों ने छतरी बनाई थी. वह छतरी भी दूर जाकर गिर गई.
विश्व शांति के लिए हो रहा यज्ञ
ईश्वर गुर्जर ने कहा कि विश्व शांति व विश्व कल्याण के लिए यज्ञ का आयोजन हो रहा है. यहां यज्ञ में आहुतियां दी जा रही हैं. प्रतिदिन शाम को भगवान देवनारायण से जुड़े भजनों की प्रस्तुति और गाथाओं का वाचन किया जाएगा.

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