क्या आने वाली है वैश्विक मंदी? 'Rich Dad Poor Dad' के लेखक ने दी कड़ी चेतावनी
मशहूर किताब ‘रिच डैड पुअर डैड’ के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। 78 साल के कियोसाकी ने लिखा कि बेरोजगारी का डर पूरी दुनिया में एक वायरस की तरह फैल रहा है। उन्होंने अपनी पुरानी किताब ‘रिच डैड्स प्रोफेसी’ का जिक्र करते हुए कहा कि वो पहले ही एक नए ‘ग्रेट डिप्रेशन’ की आशंका जता चुके हैं। हालांकि, वो उम्मीद करते हैं कि उनकी ये भविष्यवाणी गलत साबित हो। अपनी पोस्ट में उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था में गिरावट आती है, तो घबराने की बजाय इसे मौके के तौर पर देखें।
कियोसाकी ने अपने पोस्ट में लिखा, “अगर मेरी भविष्यवाणी सही हुई और वैश्विक अर्थव्यवस्था धराशायी हो गई, तो याद रखें कि जो लोग तैयार हैं, उनके लिए संकट एक सुनहरा अवसर हो सकता है। जो लोग पहले से तैयार हैं, वो अच्छा कर सकते हैं।”
उन्होंने 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट का उदाहरण दिया, जब उन्होंने इस स्थिति को नुकसान की बजाय सीखने और कमाई का मौका बनाया। वो कहते हैं कि संकट के समय बाजार में ‘रियल एसेट्स’ यानी असली संपत्तियां सस्ते दामों पर मिलती हैं।
निवेश की रणनीति और सलाह
कियोसाकी ने मशहूर निवेशक वॉरेन बफेट का हवाला देते हुए समझाया कि संकट के समय समझदारी से निवेश करना चाहिए। उनकी 2004 की किताब में भी उन्होंने बाजार में होने वाली घबराहट और उससे निपटने की बात कही थी। वो कहते हैं कि जब बाजार में अफरा-तफरी मचती है, लोग डरकर अपनी संपत्तियां बेचने लगते हैं, लेकिन यही वो समय होता है जब सही निवेशक मौके तलाशते हैं। कियोसाकी ने क्रिप्टोकरेंसी का उदाहरण देते हुए पूछा, “अगर बिटकॉइन 300 डॉलर प्रति कॉइन तक गिर जाए, तो क्या आप रोएंगे या खुशी मनाएंगे?”
उन्होंने एक पुरानी पोस्ट में निवेश की रणनीति भी शेयर की थी, जिसमें कहा गया था, “आपका मुनाफा तब बनता है, जब आप खरीदते हैं, न कि जब आप बेचते हैं।” निवेशकों को हौसला देने के लिए उन्होंने ओपरा विन्फ्रे, अब्राहम लिंकन, बेंजामिन फ्रैंकलिन और जॉर्ज पैटर्नो के प्रेरक विचार भी शेयर किए। उनका कहना है कि घबराहट के माहौल में ठंडे दिमाग से फैसले लेने वाले ही बाजी मारते हैं।
बता दें कि रॉबर्ट कियोसाकी ने इससे पहले बताया था कि दुनिया भर के अमीर लोग धीरे-धीरे गरीबी की ओर बढ़ रहे हैं। इसके लिए उन्होंने मशहूर ब्रांड मैकडॉनल्ड्स और बर्गर किंग के मालिकों का उदाहरण दिया था, जिनकी संपत्तियां धीरे-धीरे कम हो रही हैं। उन्होंने इसका कारण दुनिया भर में बढ़ती गरीबी और लोगों के खरीदने की क्षमता में गिरवाट को दिया था।

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