स्वास्थ्य सेवाओं की 'सुपर वुमन' आशा कार्यकर्ताओं को मिलेगा 5000 रुपये का नकद पुरस्कार
मंडला: आशा कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों के ज्ञान को परखने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) दिल्ली के माध्यम से तीन चरणों में परीक्षा आयोजित की। इस परीक्षा में मंडला जिले के पांच विकासखंडों से चयनित 271 आशा कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों ने भाग लिया। परीक्षा के अंतिम चरण की लिखित परीक्षा में 266 अभ्यर्थी शामिल हुए।
परीक्षा तीन चरणों में आयोजित की गई
स्वास्थ्य विभाग द्वारा चयनित परीक्षा केंद्र केंद्रीय विद्यालय मंडला में आयोजित परीक्षा में बम्हनी, मोहगांव, नारायणगंज, बिछिया और नैनपुर विकासखंडों की चयनित आशा कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों ने भाग लिया। परीक्षा शासन द्वारा निर्धारित पैटर्न पर डेढ़ घंटे की लिखित परीक्षा के रूप में आयोजित की गई। इससे पहले पहले चरण में आंतरिक ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की गई थी। दूसरे चरण में फील्ड वर्क से संबंधित प्रायोगिक परीक्षा ली गई, जिसमें आशा कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों के कौशल का मूल्यांकन किया गया। इसके बाद तीसरे चरण में लिखित परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें 271 में से 266 प्रतिभागियों ने भाग लिया। परीक्षा केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्य की देखरेख में आयोजित की गई।
स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने की पहल
मंडला जिले में आशा कार्यकर्ता शिशुओं से लेकर बुजुर्गों तक की स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उनके ज्ञान को परखने और सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से यह परीक्षा आयोजित की गई। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) द्वारा परीक्षा के लिए मानक तय किए गए थे। इस परीक्षा में सफल होने पर आशा कार्यकर्ताओं को प्रमाण पत्र और 5000 रुपए का नकद पुरस्कार दिया जाएगा।
स्कूल के दिन याद आ गए
परीक्षा देने आईं कई आशा कार्यकर्ताओं ने बताया कि सालों बाद बोर्ड परीक्षा की तर्ज पर परीक्षा देना उनके लिए अनूठा अनुभव था। परीक्षा शुरू होने से पहले सभी परीक्षार्थियों ने अपने कमरे और रोल नंबर चेक किए। परीक्षा केंद्र में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, जहां मोबाइल फोन और अन्य सामग्री बाहर रखवाई गई थी। यह माहौल देखकर आशा कार्यकर्ताओं को अपने स्कूल के दिन याद आ गए। डीसीएम हिमांशु सिंगौर ने बताया कि क्षेत्र में आशा कार्यकर्ताओं का योगदान महत्वपूर्ण है। इस परीक्षा का उद्देश्य उनका ज्ञान बढ़ाना और सेवा की गुणवत्ता में सुधार लाना है। परीक्षा में शामिल होने से पहले आशा कार्यकर्ताओं ने पूरी तैयारी की और परीक्षा को लेकर काफी उत्साहित नजर आईं। परीक्षा के पहले दो चरणों में उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया और अब लिखित परीक्षा के परिणाम के बाद उनकी योग्यता साबित होगी।

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