श्री कृष्ण जन्म की कथा सुनकर भावविभोर हुए श्रद्धालु भगवान की लीला वे स्वयं ही समझ सकते हैं- पं. राजेश पाण्डेय
बस्ती । अवतार के तीन भेद किए गए हैं जन्म, समागम और प्राकट्य। शरीर का जन्म होता है, आत्मा और शरीर का समागम होता है, ईश्वर का केवल प्राकट्य होता है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भक्तों का उद्धार व पृथ्वी को दैत्य शक्तियों से मुक्त कराने के लिए अवतार लिया था। जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। यह सद्विचार कथा व्यास पं. राजेश पाण्डेय सिंटू महाराज ने हर्रैया विकासखण्ड के समौड़ी गाँव में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन व्यक्त किया। महराज जी ने कहा कि भगवान हमेशा अपने भक्तों का ध्यान रखते हैं। उन्होंने कहा कि जब-जब धरती पर पाप, अनाचार बढ़ता है, तब-तब भगवान श्रीहरि धरा पर किसी न किसी रूप में अवतार लेकर भक्तों के संकट को हरते हैं। जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान की लीला वे स्वयं ही समझ सकते हैं। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए। कथा के दौरान कथा व्यास ने तमाम गीतों के माध्यम से श्रीकृष्ण जन्म का वर्णन किया और साथ ही निकाली गई झांकी ने दर्शकों का मन मोह लिया सभी श्रद्धालु झूम उठे। इस दौरान मुख्य यजमान राम सुमति मिश्र, सीता देवी, देवेंद्र नाथ मिश्र बाबू जी, धीरेन्द्र नाथ मिश्र, श्रीनाथ मिश्र, सुरेंद्र नाथ मिश्र, नन्द कुमार मिश्र, रामफूल मिश्र, उमेश मिश्र, चन्द्र प्रकाश मिश्र, पशुपतिनाथ शुक्ल, विश्व प्रकाश मिश्र, राम जियावन शुक्ल, राधा मोहन मिश्र, लालजी मिश्र, अशोक कुमार मिश्र, महेंद्र कुमार मिश्र, पवन शुक्ल, रामप्रसाद मिश्र, विजय मिश्र, चंद्रमणि मिश्र, भरत, संतोष मिश्र, रवीश कुमार मिश्र, वेद प्रकाश मिश्र, उत्तम मिश्र, सतीश शुक्ल लायक, हरीश, गोपाल, रत्नेश, प्रभात, अत्रय, बाबूलाल, लल्लू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे

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