इस दिन घर पर न जलाएं चूल्हा, मां शीतला देवी की बरसेगी कृपा, यह है पूजन का विशेष समय
शीतला अष्टमी का पर्व इस बार 21 मार्च को विशेष संयोग के साथ मनाया जाएगा. हिंदू धर्म का यह पर्व हर साल धार्मिक तिथि के अनुसार, होली के बाद आने वाली सप्तमी और अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. इस विशेष पर्व को ऋतु परिवर्तन होने का संकेत भी माना जाता है. इस पर्व वाले दिन मां शीतला की विधि विधान से ना केवल आराधना की जाती है बल्कि उन्हें बासी पकवानों का प्रसाद भी चढ़ाया जाता है. मान्यता ऐसी है कि शीतला अष्टमी वाले दिन मां शीतला बासी पकवानों से ही जल्दी प्रसन्न होती है.
शीत ऋतु के अंत का प्रतीक है यह पर्व
कि शीतला अष्टमी का पर्व हर साल होली के बाद आने वाली सप्तमी-अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. वह कहते हैं कि यह पर्व ऋतु परिवर्तन का संकेत है. इस पर्व के दिन से ही शीत ऋतु का अंत होता है और गर्मी की ऋतु का आगमन होता है. जिससे छोटे बच्चों में चेचक और त्वचा पर होने वाले चर्म रोगों का खतरा बढ़ जाता है. इन्हीं सभी खतरों और बीमारियों से बचाव के लिए शीतला अष्टमी के दिन मां शीतला का पूजन किया जाता है.
विशेष संयोग में मनाई जाएगी 21 मार्च को शीतलाष्टमी
इस साल शीतला अष्टमी 21 मार्च को मनाई जाएगी. पं. धीरज शर्मा के अनुसार-होली के बाद आने वाली सप्तमी तिथि इस बार रात को 2:24 पर आरंभ होगी. 21 मार्च के दिन 4:24 तक रहेंगी. इस बार शीतला अष्टमी एक विशेष संयोग के साथ मनाई जाएगी. पं. धीरज शर्मा के अनुसार इस वर्ष शीतला अष्टमी शुक्रवार के दिन आई है. जो कि अपने आप में बेहद खास है क्योंकि शुक्रवार का दिन ठंडा होता है. और शीतला माता का भी पूजन ठंडा वार को ही किया जाता है. इसलिए इस साल के शीतला अष्टमी के पर्व शुक्रवार के दिन होने के कारण इस पर्व का महत्व इस बार और भी बढ़ने वाला है.
इन पकवानों के प्रसाद से खुश होंगी मां शीतला
पं.धीरज शर्मा का कहना है कि शीतला माता को खुश करने के लिए भक्तों को इस बार 20 मार्च की रात को ही कुछ विशेष ठंडे पकवान बनाने चाहिए. शीतला अष्टमी के पर्व पर शीतला माता सबसे ज्यादा दही, ठंडे मीठे चावल और गुड़ के मीठे चावल, मीठी रोट से सबसे ज्यादा प्रसन्न होती है इसलिए इन पकवानों को शीतला अष्टमी के पूजन में प्रसादी के लिए जरूर शामिल करें.
यें है पूजन का शुभ मुहूर्त
21 मार्च, शीतला अष्टमी के दिन पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 6:24 से लेकर शाम को 6:30 तक रहेगा. पंडित धीरज शर्मा का कहना है कि संभव हो सके तो इस दिन कोई भी व्यक्ति घर का चूल्हा नहीं जलाएं और जो पकवान एक दिन पूर्व शीतला माता के पूजन के लिए बनाए हैं उन्हीं ठंडे पकवानों का इस दिन सेवन करें. उनका कहना है कि ऐसा करने से मां शीतल की कृपा परिवार पर हमेशा बनी रहती है. साथ ही इस पर्व वाले दिन स्कंद पुराण में वर्णित शीतला अष्टक का पाठ भी करना चाहिए.

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