इजराइली पीएम नेतन्याहू भ्रष्टाचार में फंसे अब राष्ट्रपति से मांग रहे क्षमादान
तेलअवीव। गाजा समते कई देशों पर हमला करने वाले इजराइल के पीएम नेतन्याहू भ्रष्टाचार के मामलों में इस कदर घिर गए कि अब वह राष्ट्रपति से क्षमादान मांग रहे हैं। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मुकदमे पर रोक लगवाने के लिए उन्होंने राष्ट्रपति से माफी मांगी है। नेतन्याहू इजराइल के ऐसे पहले पीएम हैं जो कि मुकदमे के बावजूद पद पर मौजूद हैं। नेतन्याहू पर विश्वासघात, रिश्वत लेने और पैसे के बदले टेलीकॉम कंपनियों और हॉलिवुड प्रोड्यूसर से राजनीतिक समर्थन हासिल करने का आरोप है।
नेतन्याहू इन आरोपों को लेकर देश की न्याय व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह अनुरोध क्षेत्र में अहम बदलावों के दौर में देश को एकजुट करने में मदद करेगा। हालांकि नेतन्याहू के विरोधियों ने तुरंत इसकी निंदा की और कहा कि इससे इजराइल की लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर होंगी और यह खतरनाक संदेश जाएगा कि वह कानून के शासन से ऊपर हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा कि नेतन्याहू ने राष्ट्रपति से क्षमादान का अनुरोध किया है।
बेंजामिन नेतन्याहू पर तीन मुकदमे चल रहे हैं लेकिन उन्हें अब तक किसी भी मामले में दोषी नहीं करार दिया गया है। हालांकि इन मुकदमों से उनका करियर दांव पर लगा है। अगर किसी भी मामले में उन्हें दोषी पाया जाता है तो उन्हें तत्काल इस्तीफा देना पड़ सकता है। नेतन्याहू ने इस मामले की निंदा करते हुए इसे मीडिया, पुलिस और न्यायपालिका द्वारा साजिश के तहत निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया है।
उन्होंने यह भी कहा कि हफ़्ते में तीन बार अदालत में पेश होने की उनकी अनिवार्यता एक ऐसा ध्यान भटकाने वाला कदम है जिससे उनके लिए देश का नेतृत्व करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि मुकदमे का जारी रहना हमें अंदर से तोड़ देता है, विभाजन करता है और दरार को और गहरा करता है। देश के कई अन्य लोगों की तरह, मुझे भी यकीन है कि मुकदमे के तुरंत निपटारे से सुलह को बढ़ावा मिलेगा, जिसकी हमारे देश को सख्त जरूरत है। हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि क्षमादान का अनुरोध मुकदमे को नहीं रोक सकता।
नेतन्याहू के अनुरोध पर विपक्ष ने तुरंत प्रतिक्रिया व्यक्त की और राष्ट्रपति से उनके अनुरोध को नहीं मानने का आग्रह किया। विपक्षी नेता यायर लापिड ने कहा कि आप उन्हें अपराध स्वीकार किए बिना, पश्चाताप की अभिव्यक्ति के बिना और राजनीतिक जीवन से तत्काल संन्यास लिए बिना क्षमादान नहीं दे सकते हैं।

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